केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आमतौर पर सबसे पहले पे कमीशन के फायदे मिलते हैं. इसके बाद राज्य सरकारें उनका पालन करती हैं. हालांकि राज्य अपने खुद के कमीशन बना सकते हैं, जिन्हें लागू करने में देरी हो सकती है.
8th Pay Commission
8th Pay Commission: सेंट्रल पे कमीशन की सिफारिशें लागू होने के बाद सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों को सबसे पहले इसका फायदा मिलता है. राज्य भी सिफारिशों को लागू करने के लिए केंद्र का पालन करते हैं. कुछ मामलों में राज्य अपने पे कमीशन बनाते हैं. इस महीने असम सरकार ने अपना पे कमीशन बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राज्य पे कमीशन की सिफारिशों को उसी दिन लागू करते हैं जिस दिन केंद्र करता है? और क्या राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान है? क्या राज्य कर्मचारियों को भी एरियर मिलेगा? अगर हां, तो किस तारीख से? आइए जानते हैं 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के बारे में कुछ सवालों के जवाब…
राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का भी पेआउट रिवीजन होता है. उनकी सैलरी, पेंशन और भत्ते रिवाइज किए जाते हैं, जिनकी शर्तें राज्य की अर्थव्यवस्था और बजट से जुड़ी होती हैं. इसके कारण सेंट्रल पे कमीशन की सिफारिशों को तुरंत लागू करने के बजाय, राज्य अपने खुद के पे कमीशन बना सकते हैं.
यह ज़रूरी नहीं है कि राज्य सरकारें अपने पे कमीशन को केंद्र के साथ अलाइन करें और हर 10 सालों में सैलेरी रिवाइज करें. जैसे केरल में 11वां पे कमीशन चल रहा है. कर्नाटक में 7वां पे कमीशन है और पंजाब में 6वां पे कमीशन है. ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज़ फेडरेशन के नेशनल प्रेसिडेंट मनजीत सिंह पटेल की मानें, तो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पे कमीशन चलने के बावजूद, राज्यों में पे स्ट्रक्चर चलने के बावजूद और केंद्र में पे स्ट्रक्चर लगभग एक जैसा ही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार के पे कमीशन की प्रक्रिया भी सेंट्रल पे कमीशन जैसी ही होती है. इसके लिए एक चेयरमैन और कमेटी के सदस्यों को नियुक्त किया जाता है. इसके बाद पे कमीशन अपनी रिपोर्ट तैयार करके जमा करता है. फिर मंत्रियों का एक ग्रुप उस पर विचार करता है और सुझाव देता है. इसके बाद राज्य सरकार उसे लागू करती है.
राज्य सरकार के कर्मचारियों को पिछले वेतन आयोग के खत्म होने के अगले दिन से एरियर मिलना चाहिए. उत्तर प्रदेश में जहां 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को केंद्रीय वेतन आयोग के कार्यकाल के साथ खत्म हो गया. इसलिए राज्य में कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2026 से एरियर मिलना चाहिए लेकिन यह तभी पता चलेगा जब राज्य सरकार इसकी घोषणा करेगी.
अधिकतर पे कमीशन लागू होने की तारीख पे कमीशन के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में दी जाती है. हालांकि इस बार 8वें CPC में लागू होने की कोई कंफर्म तारीख नहीं है. इसलिए जब तक केंद्र या राज्य कोई तारीख अनाउंस नहीं करते, तब तक इस बात का पता नहीं चलता कि किस तारीख से कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर मिलने लगेगा.
नेक्सडिग्म के पेरोल सर्विसेज़ के डायरेक्टर रामाचंद्रन कृष्णमूर्ति ने बताया कि अगर केंद्र सरकार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) की सिफारिशों को लागू कर देता है, तो राज्य सरकार उन्हें अपनाने के लिए किसी भी कानूनी समय सीमा से बंधी नहीं होती. जो राज्य जल्दी बदलाव को अपनाते हैं, वे अक्सर केंद्र के साथ तालमेल बिठाकर 6 महीने से 1 साल के अंदर बदलाव लागू कर देते हैं. वहीं ज्यादातर राज्य 1 से 3 साल का समय ले लेते हैं क्योंकि वे वित्तीय असर का आकलन करने और सही बदलावों की सिफारिश करने के लिए अपने खुद का राज्य वेतन आयोग बनाते हैं.
साल 2016 में CPC को लागू करने के बाद कई राज्यों ने एक साल के अंदर रिवाइज्ड पे स्केल अपना लिया. वहीं कुछ राज्यों को 2020 या उससे भी ज़्यादा समय लगा. पिछले पे कमीशन साइकल के दौरान भी इसी तरह का धीरे-धीरे लागू करने का तरीका देखा गया था.
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