Best Retirement Schemes For Private Employees: हर एक एम्प्लॉई को नौकरी के बाद रिटायरमेंट की जिदंगी को लेकर चिंता रहती है. कुछ लोग अपने रिटायरमेंट लाइफ के लिए प्लान करते हुए और किसी अच्छे फंड में इंवेस्ट करते हैं.
Best Retirement Schemes For Private Employees
Best Retirement Schemes For Private Employees: हर एक एम्प्लॉई को नौकरी के बाद रिटायरमेंट की जिदंगी को लेकर चिंता रहती है. कुछ लोग अपने रिटायरमेंट लाइफ के लिए प्लान करते हुए और किसी अच्छे फंड में इंवेस्ट करते हैं. सरकारी कर्मचारियों को तो गवर्मेंट की ओर से पेंशन समेत कई तरह के लाभ मिलते हैं लेकिन प्राइवेट नौकरी करने वाला एक आम एम्प्लाई का क्या. अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापे को अच्छे से जीना चाहते हैं तो आपके पास भी कई स्कीम हैं. आपको सरकारी 5 पेंशन स्कीम के बारे में जरूर जानना चाहिए, जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद सहारा मिलता है.
प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों के लिए प्रॉविडेंट फंड यानी PF बहुत बड़ा सपोर्ट होता है. PF अकाउंट से पेंशन फैसिलिटी भी मिलती है. कर्मचारी अपनी सैलरी का 12% कॉन्ट्रिब्यूशन EPF में देता है. उतनी ही रकम एम्प्लॉयर भी देता है. बता दें कि एम्प्लॉयर के कॉन्ट्रिब्यूशन का 8.33% EPS में डिपॉजिट होता है. अगर आप पेंशन की सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं तो कम से कम 10 साल तक EPS में कॉन्ट्रीब्यूशन जरूरी है. कुल मिलाकर कम से कम 10 साल तक और मैक्सिमम पेंशनेबल सर्विस 35 साल तक होनी चाहिए. यदि कोई प्राइवेट नौकरी करता है तो आपको रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित रकम पेंशन के तौर पर मिलेगी.
इस सूची में नेशनल पेंशन सिस्टम दूसरे नंबर पर है. NPS स्कीम को भारत सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. इसका उद्देश्य लोगों को नौकरी पूरी होने के बाद एक स्थायी और भरोसेमंद आय प्रदान करना है. इस स्कीम को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. पहले यह केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए मिलती थी लेकिन 2009 से इसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए ओपन कर दिया गया. इसमें निवेशक अपनी पसंद से इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश कर सकता है. NPS में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट क सेक्शन 80CCD के तहत टैक्स छूट मिलती है. 60 साल की उम्र के बाद निवेशक 60% राशि चाहे तो निकाल सकता है. बाकि 40% रकम से आजीवन पेंशन शुरू होती है.
बता दें कि अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में कर्मचारी ना भी हैं तो भी एक भारतीय के लिए अटल पेंशन योजा का फायदा मिलता है. कम प्रीमियम देकर पहले इसमें कुछ मामूली सी रकम देकर रुपए जमा करना होता है. बाद में इस पेंशन प्लान के तहत 60 साल की उम्र होने पर प्रत्येक महीने 1000 से 5000 रुपये की पेंशन मिलने लगती है. इस स्कीम के तहत 18 से 40 साल के बीच के भारतीय नागरिकों के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में इनकम का जरिया देना है. निश्चित उम्र का कोई भी शख्स अटल पेंशन योजना अकाउंट खुलवा सकता है. अटल पेंशन स्कीम में 1 हजार से 5 हजार रुपये हर महीने पेंशन लेने के लिए आवेदक को 42 रुपये से लेकर 210 रुपये प्रतिमाह तक का इंवेस्ट करना होता है. इतने का निवेश करने के लिए 18 साल की उम्र में स्कीम लेनी होगी. मैक्सिमम कॉन्ट्रीब्यूशन 5 हजार रुपये है.
सरकार ने असंगठित क्षेत्र के लोगों को बुढ़ापे में सहारा देने के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना शुरू की. इस योजना में जिनकी आय 15 हजार रुपए से कम है, उन्हें 60 साल की उम्र के बाद 3000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिलती है. यह स्कीम साल 2019 में शुरू की गई थी. यह योजना असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए है. इनमें घर में काम करने वाले, रेहड़ी लगाने वाले दुकानदार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, मिड-डे मील वर्कर, रिक्शा चालक, निर्माण कार्य करने वाले मजदूर, कूड़ा बीनने वाले, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा, कृषि कामगार, मोची, धोबी, चमड़ा कामगारों सम्मिलित किया गया है. इस योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के वर्कर्स को 60 साल की उम्र के बाद 3000 रुपये पेंशन मिलती है. लाभार्थी जितना धन देता है उतनी ही रकम सरकार मिलाती है. यदि आप 200 रुपए कंट्रीब्यूशन हर महीने करते हैं तो सरकार भी 200 रुपए मिलाती है. यह एक अच्छी स्कीम है.
अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना ESIC के द्वारा चलाई जाने वाली स्कीम है. यह कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत आने वाले बीमित व्यक्तियों को बेरोजगारी की स्थिति में आर्थिक मदद प्रदान करती है. इसके तहत यदि कर्मचारी नौकरी से बाहर हो जाता है, तो उसे अधिकतम 3 महीने तक मासिक वेतन का 50% बेरोजगारी भत्ता मिलता है. ये स्कीम उन बीमित व्यक्तियों के लिए है, जो ESI अधिनियम, 1948 के तहत कवर हैं. जिन्होंने कम से कम 2 साल तक बीमा योग्य रोजगार किया है. बेरोजगारी से ठीक पहले की 12 महीनों में कम से कम 78 दिनों का योगदान दिया है.
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