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डॉक्टर बाबू, पीजी ही सब कुछ नहीं है! एमबीबीएस के बाद के छिपे हैं कई रास्ते

एमबीबीएस के बाद पीजी (MD/MS) करने का सामाजिक और पेशेवर दबाव (Social and Professional Pressure) इतना ज्यादा देखने को मिलता है कि छात्र ज्यादातर अन्य बेहतरीन अवसरों को देख ही नहीं पाते हैं.

Is PG After MBBS Compulsory: जहां, आज के दौर में मेडिकल छात्रों के बीच यह एक धारणा बन गई है कि बिना एमडी (MD) या फिर एमएस (MS) के डॉक्टर की कोई पहचान नहीं है. तो वहीं, अस्पतालों की भीड़ को देखते हुए एक एमबीबीएस डॉक्टर को ज्यादातर यह महसूस कराया जाता है कि उसकी डिग्री पूरी तरह से अधूरी है.

तो वहीं,  असली में हकीकत यह है कि एमबीबीएस के बाद स्नातकोत्तर (PG) करना कानूनी या पेशेवर रूप से अनिवार्य नहीं माना जाता है. दरअसल, यह पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत पसंद और करियर के लक्ष्यों पर फिलहाल, निर्भर करता है. अगर आप सर्जरी या जटिल उपचारों में नहीं जाना चाहते, तो चिकित्सा जगत में ऐसे कई आकर्षक रास्ते हैं जिनके बारे में कॉलेज के गलियारों में चर्चा तक नहीं होती है. 

छात्र के मानिसक स्वास्थ्य पर पड़ता है असर

ऐसा कहा जाता है कि ज्यादातर छात्र ‘नीट पीजी’ (NEET PG) की तैयारी में सालों लगा देते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शुरुआती करियर पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है. तो वहीं, दूसरी तरफ  एमबीबीएस स्नातक के रूप में आप सीधे तौर पर ‘प्राइमरी केयर फिजिशियन’ या ‘जनरल प्रैक्टिशनर’ बन सकते हैं. इसके अलावा ग्रामीणों जैसे क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी देखने को मिलती है, जहां एक अनुभवी एमबीबीएस डॉक्टर किसी विशेषज्ञ से कम सम्मान नहीं पाता है. 

डॉक्टरी के साथ-साथ क्या है अन्य विकल्प?

डॉक्टर बनने का मतलब यह नहीं है कि सिर्फ स्टेथोस्कोप लेकर मरीज देखना होता है, ऐसे कई विकल्प हैं जिनके बारे में लोगों को बहुत कम ही पता होगा. 

1. अस्पताल प्रशासन और प्रबंधन (MBA in Healthcare)

अगर आपकी क्षमता अच्छी है, तो आप अस्पताल चलाने की बागडोर को पूरी तरह से संभाल सकते हैं. इसके अलावा, बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों को ‘डॉक्टर-मैनेजर्स’ की सबसे ज्यादा सख्त जरूरत देखने को मिलती है. 

2. पब्लिक हेल्थ ऑफिसर (MPH)

तो वहीं, डब्ल्यूएचओ (WHO) या फिर यूनिसेफ (UNICEF) जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर स्वास्थ्य नीतियों पर काम करना एक बेहद ही प्रतिष्ठित विकल्प माना जाता है. 

3. फार्मास्यूटिकल और रिसर्च

तो वहीं, दूसरी तरफ दवाओं के ट्रायल (Clinical Trials) और नई रिसर्च में डॉक्टरों की सबसे ज्यादा अहम भूमिका देखने को मिलती. जहां कॉर्पोरेट सेक्टर बेहतरीन सैलरी पैकेज का ऑफर करता है. 

4. मेडिकल राइटिंग और लीगल एडवाइजर

आप चाहें तो, चिकित्सा सलाहकार या फिर मेडिकल जर्नलिज्म में भी जा सकते हैं, जहां काम का दबाव कम और क्रिएटिविटी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है

Darshna Deep

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