Friday, May 27, 2022
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पंजाब आप ने राज्य में बिजली संकट के लिए पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार, लगाए ये आरोप…

  • मलविंदर सिंह कंग ने कहा-पिछली सरकारों ने अपने निजी फायदों के लिए पंजाब के थर्मल प्लांटों की हालत की बद से बदतर
  • मान सरकार बंद पड़े सभी थर्मल प्लांटों को फिर से कर रही है शुरू

इंडिया न्यूज, Chandigarh News। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब ने राज्य में बिजली समस्या (power crisis in punjab) के लिए पिछली कांग्रेस (congress) और अकाली-भाजपा (Akali-BJP) को जिम्मेदार ठहराया है। आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग (Malvinder Singh Kang) ने कहा कि रिवायती पार्टियों ने अपने निजी फायदों के लिए पंजाब के बिजली पैदा करने वाले साधनों का इस्तेमाल किया और थर्मल पावर प्लांट (thermal power plants) की हालत बद से बदतर कर दी। यही कारण है कि आज पंजाब में बिजली की समस्या पैदा हुई है।

अप्रैल और मई में बढ़ी 40 से 45 प्रतिशत बिजली की मांग

कंग ने कहा कि पिछले 108 सालों में इस साल गर्मी ने सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। जिस कारण इस साल अप्रैल और मई महीने में 40 से 45 प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ी (electricity demand increased) गई है, जोकि औसतन 10900 मेगावाट है। जबकि पिछले साल इन दोनों महीनों में बिजली की खप्त 6500 मेगावाट की थी।

कंग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और ऊर्जा मंत्री पंजाब में बिजली की मांग पूरी करने लिए दिन रात काम कर रहे हैं और लगातार योजनाएं बना रहे हैं। पंजाब में आने वाले समय में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

धान के लिए बिजली की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी

उन्होंने कहा कि धान की बिजाई के सीजन में बिजली की खप्त हर साल बढ़ जाती है, लेकिन किसानों को धान की फसल के लिए बिजली की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Maan) इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर है और वह खुद नजर बनाए हुए हैं।

प्लांट बंद करवा बिजली के स्त्रोत खत्म किए

कंग ने कहा कि आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बठिंडा के 4 (Bathinda thermal plants)
और रोपड़ के 2 थर्मल प्लांट (Ropar thermal plants) बंद करवा कर पंजाब में बिजली पैदा करने के स्रोत खत्म कर दिए। जबकि इन प्लांटों से 800 मेगावाट बिजली पैदा होती थी। जिसका खामियाजा अब पंजाब की जनता को उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि गुजरात के मुद्रा थर्मल प्लांट (Mudra Thermal Plant of Gujarat) जिससे पंजाब समेत पांच राज्यों को बिजली मिलती थी वह भी वर्ष 2018 से बंद पड़ा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के पछवाड़ा में कोयले की खदान (Coal mine in Pachwara Chhattisgarh) जोकि पंजाब को 2001 में अलाट हुई थी 2015 से किसी भी सरकार ने चलाने की कोशिश नहीं की। कंग ने कहा कि इस खदान से सालाना 70 लाख मीट्रिक टन कोयला मिलता है।

छत्तीसगढ़ में कोयले की खदान दोबारा शुरू किया जाएगा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खदान को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। जून के आखिरी हफ्ते तक इस खदान में काम शुरू हो जाएगा। खदान के शुरू होने के उपरांत पंजाब को सस्ता कोयला मिलेगा और सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपए की बचत भी होगी।

उन्होंने कहा कि मान सरकार सौर ऊर्जा (solar energy) को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। सरकार की सोलर एनर्जी कारपोरेशन आफ इंडिया (Solar Energy Corporation of India) के साथ बात चल रही है। पंजाब को आगामी समय में क्लीन और ग्रीन ऊर्जा (clean and green energy) मिलने के साथ-साथ भविष्य में पंजाब की जनता को बिजली की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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