India News (इंडिया न्यूज), Droupadi Murmu In Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जत जयंती समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन पूरे प्रदेश के लिए गौरव और आत्मीयता से भरा रहा। उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ से अपने जुड़ाव को व्यक्त किया, बल्कि यहां की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना की सराहना भी की। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “छत्तीसगढ़ से मेरा गहरा लगाव है। मैं कई बार यहां आ चुकी हूं और हर बार यही अनुभव हुआ कि छत्तीसगढ़ के लोग वास्तव में आत्मीय और सरल होते हैं। शायद इसलिए ही कहा जाता है -‘छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया’।” उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा का संबंध केवल भौगोलिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी है। उन्होंने कहा, “जिस तरह आप संबलपुर और बरगढ़ को छत्तीसगढ़ का हिस्सा मानते हैं, वैसे ही हम रायपुर को ओडिशा का हिस्सा मानते हैं। दिलों की कोई सीमा नहीं होती, हम सभी एक हैं।”
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के महत्व* पर बात करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरा धार्मिक संबंध है। उन्होंने बताया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में बनने वाले महाप्रसाद के लिए चावल छत्तीसगढ़ की धरती से जाता है। उन्होंने गुरु घासीदास जी* के सामाजिक सुधारों को याद करते हुए कहा, “250 साल पहले उन्होंने समाज सुधार का जो संदेश दिया, उसे आज हमें साकार करना है और श्रेष्ठ छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।”
छत्तीसगढ़ की प्रगति और नक्सलवाद का अंत
राष्ट्रपति ने राज्य में विकास और उद्योगों की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ खनिज, स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन में अग्रणी है। यहां के हरे-भरे जंगल, झरने और लोक शिल्प पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य अब नक्सलवाद के खात्मे के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में लोग अब शांति और विकास की ओर बढ़ रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की अपील
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिला विधायकों को संबोधित करते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ की माताओं और बहनों के आशीर्वाद से यह सदन आगे बढ़ रहा है। मैं सभी महिलाओं से कहती हूं कि वे हर क्षेत्र में नेतृत्व के लिए आगे आएं।” उन्होंने *मिनीमाता* को याद किया, जो छत्तीसगढ़ की पहली महिला लोकसभा सांसद थीं और समाज सुधार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संस्कृति और संभावनाओं की भूमि
राष्ट्रपति मुर्मू के इस भावुक संबोधन ने पूरे प्रदेश के लोगों को छू लिया। उनका संदेश स्पष्ट था – छत्तीसगढ़ सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि संस्कृति, समर्पण और संभावनाओं की भूमि है।
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