India News (इंडिया न्यूज), Buri Nazar Utarne ka Sahi Din: बुरी नजर, जिसे बुरी ऊर्जा या नकारात्मक दृष्टि का प्रभाव भी कहा जाता है, विभिन्न संस्कृतियों में एक व्यापक धारणा है। यह माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति किसी पर ईर्ष्या या नकारात्मक भावनाओं से भरी नजर डालता है, तो वह व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, या आर्थिक परेशानियों का सामना कर सकता है। इसे दूर करने के लिए कुछ खास दिन और समय महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आइए जानते हैं, हिंदू और इस्लामी परंपराओं में बुरी नजर उतारने के सही दिन और उनके महत्व।

हिंदू परंपरा में बुरी नजर उतारने के दिन

हिंदू धर्म में बुरी नजर उतारने के लिए मंगलवार, शनिवार और रविवार को सबसे उपयुक्त माना जाता है।

  1. मंगलवार: इस दिन को हनुमान जी का दिन माना जाता है। हनुमान जी को बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाने वाला देवता माना जाता है। इस दिन बुरी नजर उतारने से व्यक्ति को अद्भुत मानसिक और आध्यात्मिक बल मिलता है।
  2. शनिवार: शनिदेव को न्याय के देवता माना जाता है और वे नकारात्मक ऊर्जाओं को संतुलित करने में सहायक होते हैं। शनिवार को बुरी नजर उतारने से व्यक्ति शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों से भी बच सकता है।
  3. रविवार: इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है। सूर्य देवता की सकारात्मक ऊर्जा से बुरी नजर का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

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पूर्णिमा और अमावस्या का महत्व

हिंदू परंपरा में पूर्णिमा (चंद्रमा का पूर्ण रूप) और अमावस्या (चंद्रमा का न दिखाई देना) विशेष आध्यात्मिक महत्व रखते हैं। माना जाता है कि इन दिनों में ब्रह्मांड की ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय होती है। बुरी नजर उतारने के लिए इन दिनों को उपयुक्त इसलिए माना जाता है क्योंकि यह नवीनीकरण और आत्मिक शुद्धि का समय होता है।

इस्लामी परंपरा में बुरी नजर उतारने के दिन

इस्लामी संस्कृति में बुरी नजर को “नजर-ए-बद” कहा जाता है। इसे दूर करने के लिए शुक्रवार को सबसे शुभ माना गया है।

  1. शुक्रवार: इस दिन को जुमे की नमाज के लिए पवित्र माना जाता है। शुक्रवार को परिवार और समुदाय के साथ विशेष दुआएं की जाती हैं, जिससे व्यक्ति पर से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  2. आयतों और दुआओं का उपयोग: इस्लामी परंपराओं में बुरी नजर से बचने के लिए कुरान की विशेष आयतों का पाठ और दुआएं पढ़ी जाती हैं। जैसे, “आयतुल कुर्सी” और “सूरह फलक”।

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साझा दृष्टिकोण और वैज्ञानिक आधार

  • परंपराओं का उद्देश्य: दोनों परंपराओं में इन दिनों का चयन इस आधार पर किया गया है कि ये दिन व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो बुरी नजर उतारने के रीति-रिवाज मनोवैज्ञानिक राहत प्रदान करते हैं। यह व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ावा देता है।

बुरी नजर उतारने के लिए सही दिन और समय का पालन करना व्यक्ति की परंपराओं और विश्वासों पर निर्भर करता है। चाहे वह हिंदू धर्म के अनुसार मंगलवार, शनिवार और रविवार हो, या इस्लामी परंपरा के अनुसार शुक्रवार, हर संस्कृति अपने तरीके से नकारात्मक ऊर्जाओं से बचने के उपाय प्रदान करती है। पूर्णिमा और अमावस्या जैसे विशेष अवसर भी इस प्रक्रिया में अतिरिक्त प्रभावशाली माने जाते हैं।

यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार सलाह के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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