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Vinayak Chaturthi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जिसे ढुण्ढिराज या मनोरथ चतुर्थी भी कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि, सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं साल 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा.
Vinayak Chaturthi 2026: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला विनायक चतुर्थी व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है. इस तिथि को ढुण्ढिराज चतुर्थी भी कहा जाता है और कुछ ग्रंथों में इसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से उल्लेखित किया गया है. इस दिन गणपति के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा की जाती है, जिन्हें विघ्नों को दूर करने वाला और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है.
इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास है. साथ ही 20 फरवरी को दोपहर 2:38 बजे से रात 9:24 बजे तक और 21 फरवरी को सुबह 9:23 बजे से रात 10:22 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी गई है.
हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. वर्ष 2026 में फाल्गुन मास की यह चतुर्थी 21 फरवरी को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. भगवान गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिपति माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर होगा और इसका समापन 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे होगा. पूजा के लिए मध्याह्न काल को सबसे उत्तम माना गया है. इस दिन मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 1 बजे तक रहेगा. इसी समय भगवान गणेश की पूजा, मंत्र-जप और व्रत का संकल्प करना शुभ माना जाता है.मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से गणपति की उपासना करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और ज्ञान व धन में वृद्धि होती है. कई भक्त इस दिन विशेष रूप से मोदक और दूर्वा अर्पित कर गणेश जी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं.
चतुर्थी तिथि से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा चंद्र दर्शन से संबंधित है. मान्यता है कि इस दिन निर्धारित समय में चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए.
इन समयों में चंद्रमा को देखने से बचने की सलाह दी जाती है. यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो गणेश स्तोत्र या संबंधित मंत्रों का जप करने की परंपरा बताई गई है.
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