Thyroid Explainer: देश की एक बड़ी संख्या थाइराइड की समस्या से जूझ रही है. बता दें कि, थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. यह गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पाई जाती है. यह हार्मोन असंतुलित होने पर थायराइड की समस्या होती है. जानिए इससे जुड़ी कई और रोचक जानकारियां-
थायरॉइड से जुड़ी जानकारियां. (Canva)
Thyroid Explainer: देश की एक बड़ी संख्या थाइराइड की समस्या से जूझ रही है. बता दें कि, थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. यह गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पाई जाती है. यह शरीर में तब तक सही है जब तक कंट्रोल में रहे. यह हार्मोन असंतुलित होने पर थायराइड की समस्या होती है. इसका समय रहते इलाज न हुआ तो यह भयावह भी हो सकता है. थायराइड मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं, जिसमें हाइपो थायराइड और हाइपर थायराइड शामिल है. थायराइड हार्मोन असंतुलित होने पर शरीर के कई हिस्सों में दर्द होने लगता है.
बता दें कि, थायरॉइड ग्रंथि में छोटी-छोटी थैली जैसे टुकड़े होते हैं. जिनमें गाढ़ा द्रव होता है. इस द्रव में थायरॉइड के हार्मोन पाए जाते हैं. इन हार्मोन में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है. थायरॉइड ग्रंथि एंडोक्राइन प्रणाली का हिस्सा है. जो कई अंगों और ऊतकों से मिलकर बनी है. ये ऊतक हार्मोन यानी रासायनिक पदार्थों को पैदा करते हैं, जमा करते हैं और खून में भेजते हैं. ऐसे में लोगों का सवाल होता है कि, आखिर कैसे जानें कि शरीर में थायराइड बढ़ गया है? थायरॉइड होने से पहले और बाद में शरीर में क्या होता है? थायराइड बढ़ने पर शरीर के किन अंगों में दर्द होता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ जानकारियों के बारे में-
अगर वजह की बात करें तो, आयोडीन शरीर के लिए बहुत जरूरी है. शरीर में 80 प्रतिशत आयोडीन, थायरॉइड में पाया जाता है. खाने में आयोडीन की कमी होने से थायरॉइड ग्रंथि सूज जाती है जिसे घेंघा (गॉयटर) कहते हैं. आयोडीन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है. चाहे वो बड़ा हो या बच्चा. जानें, छोटे बच्चों में क्या करता है आयोडीन. छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी से हार्मोन का निर्माण धीमा पड़ जाता है. इससे उनके शारीरिक, मानसिक और जननांगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता. इस बीमारी को क्रीटीनिज़्म कहते हैं.
दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी थायरॉइड हो जाता है. सोया प्रोटीन, कैप्सूल और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों को जरूरत से ज्यादा लेने से भी थायरॉइड हो जाता है. त्वचा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रेडिएशन थेरेपी भी इसके होने की वजहों में से एक है. रेडिएशन थेरेपी की वजह से टॉन्सिल्स या फिर थाइमस ग्रंथि में परेशानी हो सकती है, जिस वजह से थायरॉइड हो सकता है. मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल परिवर्तन से भी थायरॉइड होता है. तनाव का असर दिमाग के साथ-साथ थायरॉइड ग्रंथि पर भी पड़ता है, जिस वजह से हॉर्मोन स्राव बढ़ने से थायरॉइड होता है. इसके अलावा, यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है, यानी माता-पिता को थायरॉइड हो तो बच्चों को होने की संभावना भी रहती है.
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अंडरएक्टिव थायराइड यानी हाइपोथायराइडिज्म होने पर अत्यधिक थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगने की समस्या, जॉइंट और मसल्स पेन, स्किन ड्राई होना, बाल झड़ना, इरेगुलर पीरियड्स, स्लो हार्ट रेट और डिप्रेशन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. दूसरी तरह हाइपरएक्टिव थायराइड यानी हाइपरथायराइडिज्म होने पर चिड़चिड़ापन, ज्यादा पसीना आना, हार्टबीट बढ़ना, मसल्स में दर्द होना और सोने में परेशानी होने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं.
थायरॉइड हार्मोन पेट में पाचक रस के बनने की गति को बढ़ाते हैं. थायरॉइड हार्मोन, ऊतकों के बढ़ने में मदद करते हैं. शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए ऊर्जा पैदा करते हैं. वे खून से खराब कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा को निकालने में लीवर की मदद करते हैं. खराब कोलेस्ट्रॉल पित्त से मिलकर मल-मूत्र के रूप में बाहर निकलता है.
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, थायरॉइड हार्मोन की कमी से शरीर में खराब कोलेस्टराल बढ़ता है. जिससे अच्छा कोलेस्टराल घटने लगता है. वहीं, थायरॉइड हार्मोन अधिक होने से दस्त और कम होने से कब्ज़ हो सकता है. क्योंकि ये हार्मोन मेटाबोलिज़म को नियंत्रण में रखता है. थायरॉइड दो तरह का होता है. पहला हाइपर थायरॉइड- जिसका वजन कम होता है. दूसरा हाइपो थायरॉइड- जिसमें वजन बढ़ता है.
थायरॉइड ठीक से काम कर रहा है या नहीं, ये पता लगाने के लिए खून में TSH और थायरॉइड हार्मोन की जांच की जाती है. थायरॉइड को एक्युप्रेशर के ज़रिए भी ठीक किया जा सकता है. एक्युप्रेशर में पैराथायरॉइड और थायरॉइड के जो बिंदू होते हैं वे पैरों और हाथों के अंगूठे के नीचे और थोड़े उठे हुए भाग में मौजूद रहते हैं. इन बिंदुओं (प्वॉइंट्स) को बांई से दांई ओर प्रेशर देना यानी दबाना चाहिए. साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
हाइपो थायरॉइड का पता टी3, टी4 और टीएसएच हॉर्मोन की जांच से चलता है. ऐसे मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. कई बार लंबे वक्त तक भी दवा लेनी पड़ती है और जीवनभर भी.
थायरॉइड में जितना आराम दवा से मिलता है, उतना ही आराम प्राणायम से भी होता है. इसलिए कोशिश करें कि रोज आधे घंटे योग करें. इसके लिए कुछ योगासन बताए गए हैं. जिसमें धनुरासन, मत्स्यासन और हलासन और प्राणायाम शामिल हैं.
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