Bipolar Disorder: हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी को अनदेखी घातक हो सकती है. ये लापरवाही का ही तो नतीजा है जो आज बड़ी संख्या में लोग तमाम मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं. ऐसी ही बीमारियों में एक बाइपोलर डिसऑर्डर है. इस स्थिति में कई बार व्यक्ति अपने व्यवहार पर भी नियंत्रण नहीं रख पाता है. अब सवाल है कि बाइपोलर डिसऑर्डर है क्या? किन लक्षणों से करें बीमारी की पहचान? इन बारे में बता रहे हैं मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
कभी गुस्सा तो कभी प्यार... जानिए इस मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारी के बारे में- (Canva)
Bipolar Disorder: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान पर तनाव सबसे ज्यादा हावी है. चाहे बिजनेस हो, करियर हो या फिर रिश्ते लोग कई तरह से मेंटल स्ट्रेस से गुजर रहे हैं. अक्सर लोग इसको नजरअंदाज कर जाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी को अनदेखी घातक हो सकती है. ये लापरवाही का ही तो नतीजा है जो आज बड़ी संख्या में लोग तमाम मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं. ऐसी ही बीमारियों में एक बाइपोलर डिसऑर्डर है. जी हां, बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की भावनाएं स्थिर नहीं रहती हैं. इस स्थिति में कई बार व्यक्ति अपने व्यवहार पर भी नियंत्रण नहीं रख पाता है. इसमें लोगों को एक पल गुस्सा तो दूसरे पल प्यार या फिर मजाक सूझने लगता है. कभी-कभार तो अजीबों गरीब हरकतें करने लगता है.
अगर इस तरह की परेशानी किसी व्यक्ति में समझ आए तो डॉक्टर से मिलने में देरी नहीं करनी चाहिए. अब सवाल है कि बाइपोलर डिसऑर्डर है क्या? किन लक्षणों से करें बीमारी की पहचान? क्या है बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज? इन सवालों के बारे में India News को बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
बाइपलोर डिसऑर्डर को द्विध्रुवीय विकार कहा जाता है और जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, यह बार-बार मूड को बदलने वाला एक विकार है. सरल भाषा में कहें तो बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति के मूड बार-बार स्विंग होने लगते हैं. इस बीमारी से जुड़ी पर्याप्त जानकारी न होने के कारण अक्सर इस बीमारी को इग्नोर कर दिया जाता है. डॉक्टर कहते हैं कि, बाइपोलर में आमतौर पर दो तरह की अवस्थाएं देखने को मिलती हैं. पहली होती है मैनिक अवस्था और दूसरी डिप्रेसिव अवस्था. मैनिक अवस्था में व्यक्ति खुद को बेहद ऊर्जावान महसूस करता है. उसे लगता है कि वह बहुत कुछ कर सकता है और कई बार वह बिना सोचे-समझे फैसले भी ले लेता है.
वहीं, डिप्रेसिव अवस्था में स्थिति बिल्कुल उलट होती है. इसमें व्यक्ति को लगातार उदासी, थकान और निराशा महसूस होती है. उसे पहले जिन चीजों में खुशी मिलती थी, उनमें भी दिलचस्पी कम होने लगती है. कई बार नींद और भूख के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिलता है. व्यक्ति को ध्यान लगाने में मुश्किल होती है और कुछ गंभीर मामलों में उसके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार भी आ सकते हैं.
डॉ. विवेक कुमार कहते हैं कि, टाइप-I बाइपोलर डिसऑर्डर (बीपीडी) की शुरुआत में उम्र आम तौर पर औसतन 12-24 वर्ष होती है. टाइप-2 बीपीडी वाले रोगियों में यह अधिक उम्र की होती है, और एकध्रुवीय प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार 1,2,3 में सबसे अधिक उम्र की होती है.
मूड में बार-बार बदलाव यानी कभी गुस्सा तो कभी मजाकिया मूड बाइपोलर डिसऑर्डर के शुरुआती लक्षण हैं. इसके अलावा, रात को नींद न आना, अचानक से दिमाग में हलचल महसूस होना, बार-बार पैनिक अटैक आना, किसी प्लान को लेकर अत्यधिक उत्साहित होना, जरूरत से ज्यादा बोलना और एक चीज पर ज्यादा समय तक ध्यान न लगाकर रख पाना आदि भी बाइपोलर के लक्षण हैं.
डॉक्टर कहते हैं कि, बाइपोलर डिसऑर्डर का कोई जड़ से इलाज नहीं है, लेकिन दवाएं हैं जिनकी मदद से इसके लक्षणों को ठीक किया जा सकता है और काफी हद तक इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है. बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज में आमतौर पर अलग-अलग प्रकार की दवाएं व सप्पोर्टिव थेरेपी आदि शामिल हैं. ज्यादातर मामलों में बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज में साइकोथेरेपी और दवाएं दोनों का ही इस्तेमाल किया जाता है.
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