Thyroid Eye Disease: थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. थायरॉइड दो तरह का होता है- हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म. इस स्थिति में आमतौर पर यही माना जाता है कि, वजन बढ़ना, थकान, सुस्ती, कब्ज, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट की समस्या होती है. लेकिन, आपको जानकार हैरानी होगी कि, थायरॉइड की बीमारी आपकी आंखों को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है. डॉक्टर आलोक रंजन से जानिए कैसे-
आंखों के लिए कहीं आफत न बन जाए थायरॉइड आई डिजीज. (Canva)
Thyroid Eye Disease: थायराइड हमारे गर्दन के सामने एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है. यह गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पाई जाती है. यह शरीर में तब तक सही है जब तक कंट्रोल में रहे. यह हार्मोन असंतुलित होने पर थायराइड की समस्या होती है. थायरॉइड दो तरह का होता है- हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म. हाइपोथायरायडिज्म यानी हार्मोन की कमी से वजन बढ़ना, थकान, सुस्ती, कब्ज, रूखी त्वचा और ठंड न सहन कर पाने की समस्या होती है. वहीं, हाइपरथायरायडिज्म यानी हार्मोन की अधिकता से वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, पसीना आना और नींद न आने समस्या होती है. लेकिन, आपको जानकार हैरानी होगी कि, थायरॉइड की बीमारी आपकी आंखों को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है. इस परेशानी को थायरॉइड आई डिजीज के नाम से जानते हैं.
हेल्थ एक्सपर्ट मानें तो, थायरॉइड आई डिजीज से ग्रस्त होने पर आंखों की मांसपेशियां और टिशूज प्रभावित हो जाती हैं. यह बीमारी ओवरएक्टिव थायरॉइड यानी हाइपरथायरॉइडिज्म के कारण होती है. इस बीमारी का इलाज न करवाया जाए, तो आंखें खराब भी हो सकती हैं. अब सवाल है कि आखिर थायरॉइड आई डिजीज क्या है? इसके लक्षण, कारण और इलाज क्या? इस बारे में India News को बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. आलोक रंजन.
डॉ. आलोक रंजन कहते हैं कि, जिन लोगों को ओवरएक्टिव थायरॉइड ग्लैंड यानी हाइपरथायरॉइडिज्म होता है, उन्हें ये समस्या अधिक होती है. ऐसे लोगों में कभी-कभी आंखों में सूजन आती है, पलकों में समस्या होती है, आंखों को हिलाने-डुलाने में दर्द होता है, आंखें लाल हो जाती हैं. आंखों के मूवमेंट को कंट्रोल करने वाली मांसपेशियों में भी सूजन, दर्द, इंफ्लेमेशन हो जाता है. वैसे यह माइल्ड होता है, जो थायरॉइड का इलाज करने से कंट्रोल हो जाता है. अगर यह गंभीर है, तो इसका इलाज अलग से होता है. आंखों से संबंधित ये समस्याएं बहुत अधिक होंगी, तो इन्हें स्टेरॉएड दवाओं से ठीक किया जाता है. यदि इलाज प्रॉपर ना मिले तो आंखों की साइज बड़ी रह सकती है, चीजें डबल नजर आती हैं, जो लगातार बनी रह सकती है. बता दें कि, थायरॉइड आई डिजीज 99 प्रतिशत लोगों में हाइपरथायरॉइडिज्म में होता है, लेकिन 1-2 प्रतिशत लोगों में यह हाइपोथायरॉइडिज्म में भी हो सकता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि जब भी हाइपरथायरॉइडिज्म की शुरुआत होती है, तभी थायरॉइड आई डिजीज के भी लक्षण नजर आने लगते हैं. रेयर केसेस में ही थायरॉएड की समस्या होने के 5-10 साल बाद थायरॉइड आई डिजीज होता है. आमतौर पर जो लोग बहुत ज्यादा स्मोक करते हैं, उनमें इस बीमारी के होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. ऐसे लोगों को गंभीर रूप से थायरॉइड आई डिजीज होती है. ऐसे में इनमें दवाओं के प्रति रिस्पॉन्स भी सही नहीं नजर आता है, जबकि जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उनमें दवाओं का असर होता है. ऐसे में स्मोकिंग बंद करना चाहिए.
अगर किसी व्यक्ति को माइल्ड समस्या है, तो सिम्पटोमैटिक ट्रीटमेंट दिया जाता है. आर्टिफिशियल टियर, आई ड्रॉप, थायरॉएड हार्मोन लेवल की मात्रा को कंट्रोल में लाना, एंटी-इंफ्लेमेटरी मेडिकेशंस आदि. यदि समस्या बहुत अधिक गंभीर है, इंफ्लेमेशन अधिक है, दृष्टि सही नहीं है, तो स्टेरॉएड के जरिए इलाज किया जाता है. गंभीर समस्या में आंखों की मसल्स में इतनी अधिक सूजन होती है कि आंखों की नस (ऑप्टिक नर्व) भी डैमेज हो सकती है. आंखों का काला हिस्सा कॉर्निया ब्रेकडाउन होकर पूरी तरह से आंखों को खराब कर सकता है. ऐसे मरीजों को तुरंत हाई डोज स्टेरॉएड देना पड़ता है. इसके अलावा, फॉलोअप बहुत जरूरी होता है.
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