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G20 Summit 2023: भव्य रात्रिभोज में भारत ने दुनिया के सामने अपने संगीत विरासत का किया प्रदर्शन, जानें प्लेलिस्ट में कौन – कौन से संगीत थे शामिल

Priyanshi Singh • LAST UPDATED : September 10, 2023, 1:05 pm IST

India News (इंडिया न्यूज),G20 Summit 2023 in Delhi India: भारत में G 20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया है। आज इस आयोजन का दूसरा दिन है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज में, भारत ने दुनिया के सामने अपनी विविध संगीत विरासत का प्रदर्शन किया गया। इसमें पूरे देश के पारंपरिक संगीत का उपयोग देखा गया। मुख्य आकर्षण ‘गंधर्व अटोद्यम’ था। यह एक अद्वितीय संगीतमय मिश्रण है जिसमें पूरे भारत के संगीत वाद्ययंत्रों की एक उत्कृष्ट सिम्फनी शामिल है, जो शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के समूह के साथ हिंदुस्तानी, लोक और समकालीन संगीत का प्रदर्शन करती है।

मुख्य आकर्षण ‘गंधर्व अटोद्यम’

राष्ट्रपति द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज में, भारत ने दुनिया को अपनी विविध संगीत विरासत का प्रदर्शन किया। इसमें पूरे देश से पारंपरिक संगीत का उपयोग देखा गया। मुख्य आकर्षण ‘गंधर्व अटोद्यम’ था। यह एक अद्वितीय संगीतमय मिश्रण है जिसमें पूरे भारत के संगीत वाद्ययंत्रों की एक उत्कृष्ट सिम्फनी शामिल है, जो शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के समूह के साथ हिंदुस्तानी, कर्नाटक, लोक और समकालीन संगीत का प्रदर्शन करती है।

प्लेलिस्ट में शामिल थे ये संगीत:

  • हिंदुस्तानी संगीत: राग दरबारी कांदा और काफ़ी-खेलत होरी
  • लोक संगीत: राजस्थान- केसरिया बालम, घूमर और निम्बुरा निम्बुरा
  • कर्नाटक संगीत: राग मोहनम – स्वागतम कृष्ण
  • लोक संगीत: कश्मीर, सिक्किम और मेघालय – बोम्रू बोम्रू
  • हिंदुस्तानी संगीत: राग देश और एकला चलो रे
  • लोक संगीत: महाराष्ट्र – अबीर गुलाल (अभंग), रेशमा चारे घानी (लावनी), गजर (वारकरी)
  • कर्नाटक संगीत: राग मध्यमावती – लक्ष्मी बरम्मा
  • लोक संगीत: गुजरात- मोरबानी और रामदेव पीयर हेलो
  • पारंपरिक और भक्ति संगीत: पश्चिम बंगाल – भटियाली और अच्युतम केशवम (भजन)
  • लोक संगीत: कर्नाटक – मदु मेकम कन्नै, कावेरी चिंदु और आद पम्बे
  • भक्ति संगीत: श्री राम चंद्र कृपालु, वैष्णव जन और रघुपति राघव।
  • हिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक संगीत: राग भैरवी- दादरा, मिले सुर मेरा तुम्हारा

दुर्लभ वाद्ययंत्रों का किया गया उपयोग 

संगीत व्यवस्था में हमारी बेजोड़ और अद्वितीय संगीत विरासत को प्रदर्शित करने वाले विभिन्न दुर्लभ वाद्ययंत्रों का उपयोग शामिल था। इन वाद्ययंत्रों में सुरसिंगार, मोहन वीणा, जलतरंग, जोडिया पावा, धंगाली, दिलरुबा, सारंगी, कमाइचा, मट्टा कोकिला वीणा, नलतरंग, तुंगबुक, पखावज, रबाब, रावणहत्था, थाल दाना, रुद्र वीणा आदि शामिल हैं।

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