India News (इंडिया न्यूज़), G-20 Summit: ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख नेताओं ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन का मुख्य फोकस भुखमरी से लड़ने के लिए एक वैश्विक समझौता, गाजा के लिए अधिक सहायता और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति की पहल रहा।

भुखमरी के खिलाफ वैश्विक समझौता:

सभी नेताओं ने संयुक्त रूप से भुखमरी से लड़ने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक वैश्विक समझौते पर जोर दिया।

गाजा और यूक्रेन संकट:

गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने और पश्चिम एशिया तथा यूक्रेन में शत्रुता समाप्त करने की अपील की गई। हालांकि, शांति प्रक्रिया के लिए पूरी तरह सर्वसम्मति नहीं बन सकी।

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वैश्विक कर और UNSC सुधार:

अरबपतियों पर वैश्विक कर लगाने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार का आह्वान किया गया। नेताओं ने यूएनएससी का विस्तार करके इसे पांच स्थायी सदस्यों से आगे बढ़ाने की आवश्यकता जताई।

फोटोशूट विवाद

सम्मेलन के बाद हुए समूह फोटोशूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे दिखे। उनके साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा भी मौजूद थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी इस फोटोशूट में शामिल नहीं हुए।

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गैरमौजूदगी की वजह:

अमेरिकी अधिकारियों ने इसे “लॉजिस्टिक मुद्दा” बताया। उन्होंने कहा कि फोटोशूट जल्दी लिया गया, जबकि बाइडेन और ट्रूडो एक बैठक में व्यस्त थे।

पीएम मोदी की उपस्थिति

फोटोशूट में पीएम मोदी की उपस्थिति और उनकी बातचीत ने उन्हें सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना दिया। उन्होंने वैश्विक नेताओं के साथ गहन बातचीत की और भारत की भूमिका को मजबूती से पेश किया।

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जी-20 की सफलता और चुनौतियां

शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन कुछ विषयों पर मतभेद भी दिखे।

सफलताएं: गाजा और यूक्रेन में शांति के प्रयासों को प्राथमिकता दी गई।
चुनौतियां: यूएनएससी सुधार और अरबपतियों पर कर लगाने जैसे मुद्दों पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।

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यह जी-20 शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। हालांकि, कई मुद्दों पर असहमति के बावजूद, वैश्विक नेतृत्व ने शांति और विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प व्यक्त किया। पीएम मोदी की सक्रिय भूमिका ने भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख को और मजबूत किया।