<

हमेशा दूसरों की गलतियां निकालने वाले लोग… क्या वाकई अकड़ू होते हैं या बात कुछ और ही है? जानिए इसके पीछे की साइकोलॉजी!

साइकोलॉजी के मुताबिक, लोगों की टोका-टाकी और गलती को तुरंत सही कराने की आदत गलत नहीं है. अक्सर ऐसी आदत को हम गंभीरता से लेते हैं. कई बार बहस भी हो जाती है लेकिन अगली बार किसी को जज करने से पहले आप उसके पीछे के कारण जरूर जान लीजिए.

हम सभी के जीवन में एक न एक इंसान तो ऐसा ज़रूर होता है, जो हर बात पर टोकने के लिए तैयार बैठा रहता है. चाहे आपने व्हाट्सएप पर स्पेलिंग की कोई छोटी-सी गलती कर दी हो, किसी शब्द को गलत तरीके से बोला हो,  बातचीत में इतिहास का कोई साल थोड़ा गलत बता दिया हो, या फिर किसी गाने की लाइन उल्टी गा दी हो. वो इंसान तुरंत बीच में कूद पड़ेंगा और आपको सही करने लगेगा. कई बार लोगों की यह आदत तीखी बहस और मनमुटाव पैदा कर देती है. पहली नज़र में ऐसा लगता है कि सामने वाला हमें नीचा दिखाने या खुद को ज्यादा होशियार साबित करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन साइकोलॉजी का कुछ और ही कहना है. 

रिसर्च बताती है कि हमेशा गलतियां सुधारने वाले लोग हर बार आपको परेशान करने की नीयत से ऐसा नहीं करते. इसके पीछे उनकी पर्सनैलिटी, उनकी आदतें और सोचने का तरीका हो सकता है. आइए समझते हैं कि आखिर कुछ लोगों में दूसरों को टोकने की यह ‘बीमारी’ या आदत क्यों होती है?

अधूरी या गलत जानकारी से बेचैनी

साइकोलॉजी में एक थ्योरी है ‘Need for Cognitive Closure’. जिन लोगों में यह भावना गहरी होती है, उन्हें गलत या उलझी हुई बातें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होतीं. अगर कोई ग्रुप में कह दे कि ‘चीन की दीवार तो अंतरिक्ष से भी दिखती है!’ तो ऐसा इंसान तुरंत बोल पड़ेगा कि ‘नहीं, यह सच नहीं है, यह सिर्फ एक अफवाह है.’ वे आपको नीचा नहीं दिखाना चाहते, बस उनके दिमाग को गलत फैक्ट सुनकर जो बेचैनी हुई थी, वे उसे शांत कर रहे होते हैं.

बारीकियों पर ध्यान देना है आदत

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग स्वभाव से ही बहुत परफेक्शनिस्ट और केयरफुल होते हैं. साइकोलॉजी के ‘बिग फाइव पर्सनैलिटी मॉडल’ के मुताबिक, ऐसे लोग छोटी से छोटी गलती को भी नजरअंदाज नहीं कर पाते. सोचिए, अगर कोई इंसान पेशे से प्रूफरीडर, एडिटर या अकाउंटेंट है- तो उसका दिमाग दिन-रात गलतियां ढूंढने के लिए ही ट्रेंड होता है. जब वे आम ज़िंदगी में किसी की बातचीत सुनते हैं, तो उनका दिमाग अपने आप गलतियों को पकड़ लेता है और वे बिना सोचे-समझे टोक देते हैं.

प्रोफेशनल आईडेंटिटी भी है जिम्मेदार

सोशल आइडेंटिटी थ्योरी के अनुसार, हम जिस पेशे से जुड़े होते हैं, वह हमारी पहचान बन जाता है.  अब अगर किसी फैमिली गेट-टुगेदर में कोई हेल्थ से जुड़ी कोई गलत बात या नुस्खा शेयर करे, तो घर का डॉक्टर रिश्तेदार तुरंत बोलेगा, ‘अरे नहीं, मेडिकल साइंस ऐसा नहीं मानती’. यहां उनका मकसद अपनी धाक जमाना नहीं, बल्कि अपने प्रोफेशन के प्रति ईमानदारी दिखाना होता है.

खुद को बेहतर महसूस कराने की कोशिश

हो सकता है कि खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए इंसान ऐसा कर रहा हो. इसे साइकोलॉजी में ‘सेल-एंहेंसमेंट थ्योरी’ कहते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि जब वे दूसरों की गलती सुधारेंगे और अपनी नॉलेज दिखाएंगे, तो लोग उन्हें समझदार मानेंगे. लेकिन साइकोलॉजिस्ट्स कहते हैं कि ऐसे हर इंसान को ‘घमंडी’ या ‘नार्सिसिस्ट’ मान लेना गलत है.

अपने अंदाज में करते हैं बात

हर इंसान का कम्यूनिकेशन स्टाइल अलग होता. डायरेक्ट बात करने वाले लोग मानते हैं कि इमोशन्स से ज्यादा जरूरी है- सच्चाई और फैक्ट्स. वे मीटिंग में भी सबके सामने आपकी गलती तुरंत सुधार देंगे. लेकिन जो लोग सहानुभूति से बात करने वाले होते हैं वो मानते हैं कि किसी का दिल न दुखे. अगर गलती दिखेगी भी, तो वे अकेले में जाकर चुपके से बताएंगे.

तो क्या सच में घमंडी होते हैं?

बिल्कुल नहीं. साइकोलॉजी कहती है कि लगातार गलतियां सुधारने या बार-बार टोका-टाकी करने का मतलब यह नहीं कि सामने वाला आपसे जलता है या खुद को बहुत बड़ा तोप समझता है. ज्यादातर मामलों में यह उनकी आदत उनके काम के माहौल या सही जानकारी देने की कोशिश का परिणाम होता है. हालांकि ऐसे लोग काफी अच्छे कम्यूनिकेटर माने जाते हैं जो सही जानकारी के साथ-साथ सामने वाले के इमोशन्स का भी ख्याल रखता है.

ये भी पढ़ें:- महिला के गले से खींच लिया सोने का लॉकेट, लोगों के दबोचते ही खेला ऐसा खौफनाक दांव… एक्स-रे रिपोर्ट देख उड़े डॉक्टर के होश!

Kajal Jain

Share
Published by
Kajal Jain
Tags: phycology

Recent Posts

पहले आंखों में डाली मिर्ची, फिर फरसा-भाले से हमला…संतकबीरनगर में पहलवान ब्रह्मानंद यादव की हत्या

Wrestler murdered in Sant Kabir Nagar: संतकबीरनगर के भकठान गांव में जिला केसरी से सम्मानित…

Last Updated: September 22, 2026 23:51:46 IST

Cancer Medicine: कैंसर की दवा 2700 में, MRP 27000! सुप्रीम कोर्ट ने कीमतों के अंतर पर जताई कड़ी नाराजगी

Cancer Medicine: कैंसर की जरूरी दवाओं की खरीद कीमत और MRP के बीच भारी अंतर…

Last Updated: September 22, 2026 23:40:12 IST

Delhi Crime: पहले पीछा किया, फिर बाइक को मारी टक्कर! हौज खास में युवती घायल, पुलिस ने दर्ज किया केस

Delhi Crime: दिल्ली के हौज खास इलाके में बाइक चला रही एक युवती को दो…

Last Updated: September 22, 2026 22:08:37 IST

राजनीति के मैदान से रियलिटी शो तक तेज प्रताप यादव, टावर में मिलेगी शाही जिंदगी या बेसमेंट में कटेंगे दिन?

Rise and Fall Season 2: वीरेंद्र सहवाग एमएक्स प्लेयर के रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’…

Last Updated: September 22, 2026 21:36:32 IST

बॉलीवुड का वो गाना, जिसके Gen Z भी हैं दीवाने, आशा भोसले-मोहम्मद रफी की आवाज, गाने ने बदली आरडी बर्मन की किस्मत

Bollywood Evergreen Song: जब भी पुराने गाने की बात होती है, जो मोहम्मद रफी के…

Last Updated: September 22, 2026 20:42:15 IST