India News (इंडिया न्यूज), MP Police Attack: मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मऊगंज, इंदौर, दमोह और शहडोल जैसे जिलों में पुलिस पर हुए हमले यह दर्शाते हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस भी असुरक्षित महसूस कर रही है।
लगातार हो रहे पुलिस पर हमले
1. छतरपुर (अगस्त 2024) – भीड़ ने पुलिस थाने पर पथराव कर दिया, जिसे उकसाया गया था।
2. राजगढ़ (दिसंबर 2024) – राजस्थान पुलिस पर ज्वेलरी चोर को पकड़ने के दौरान हमला हुआ।
3. मऊगंज (15 मार्च 2025) – शाहपुर थाना क्षेत्र में एएसआई रामचरण गौतम और एक युवक की हत्या कर दी गई।
4. दमोह (मार्च 2025) – पुलिस पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें एक जवान घायल हुआ।
5. शहडोल (मार्च 2025) – पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया।
6. इंदौर (मार्च 2025) – तुकोगंज थाना प्रभारी को भीड़ ने पीटा।
सियासी बवाल
इन घटनाओं को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार पर कानून व्यवस्था को संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया है। कांग्रेस विधायक रजनीश सिंह ने कहा कि राज्य में अराजकता फैली हुई है और सरकार इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। वहीं, भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार किसी भी कीमत पर अपराधियों को बख्शेगी नहीं और पुलिस की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी।
पुलिसकर्मियों का सोशल मीडिया पर विरोध
इन घटनाओं से आहत पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर काले प्रोफाइल पिक्चर लगाकर विरोध जताया है। ‘#JusticeForPolice’ जैसे टैग ट्रेंड कर रहे हैं, जिसमें पुलिसकर्मी सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय अब पूरी तरह अलर्ट मोड में है। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी, कमिश्नर और आईजी को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें और थानों में लगातार निरीक्षण करें।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार को जल्द ही ठोस कदम उठाने होंगे। पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि वे बिना किसी डर के अपराधियों से मुकाबला कर सकें। अपराधियों के बढ़ते हौसले और पुलिस पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए सख्त कानून और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।