Thursday, May 19, 2022
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हिजाब से लेकर लाउडस्पीकर तक, देश में बढ़ते सांप्रदायिक विवाद

इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली:
पिछले कुछ दिनों से देश में एक के बाद एक कई सांप्रदायिक विवाद (communal dispute) खड़े हुए हैं। पिछले छह महीने में सात मुद्दों पर विवाद हुए है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। एक महीने पहले तक इन विवादों को यूपी समेत पांच राज्यों के चुनावों से जोड़ा जाता था।

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चलिए जानते हैं हिजाब, किताब, हलाल से शुरू हुआ सांप्रदायिक विवाद कैसे बुलडोजर, लाउडस्वीकर, हनुमान चालिसा, मुगल और बाइबिल तक पहुंच गया?

अब तक कौन-कौन से मुद्दे उठे?

1. किताब विवाद: कर्नाटक में नवंबर 2021 से ही किताब विवाद चल रहा है। सबसे पहले राज्य सरकार ने कक्षा एक से लेकर दसवीं तक के पाठ्यक्रम से उस हिस्से को हटवाया, जिसमें कहा गया था कि हिंदू धर्म के चलते भारत में जैन और बौद्ध धर्म आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जिसके बाद सरकार ने स्कूलों में श्रीमद्भगवत गीता पढ़ाने के आदेश जारी किये। जिसका कई लोगों ने विरोध भी किया।

सरकार ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करने का फैसला किया। संशोधन के बाद टीपू सुल्तान से जुड़े एक अध्याय समेत कुछ और चैप्टर्स को हटाया जाएगा। इसके अलावा कश्मीर का इतिहास, बाबा बुदनगिरी और दत्तपीठ के बारे में पढ़ाया जाएगा। कर्नाटक में बाबा बुदनगिरी और दत्तपीठ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद की वजह रहे हैं।

2. हिजाब विवाद: इस विवाद की शुरुआत 27 दिसंबर 2021 से कर्नाटक के ही उडुपी गवर्नमेंट कॉलेज से हुई थी। कुछ मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर क्लास में आने से रोका गया था। इसके बाद ये मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने कहा कि “स्कूल-कॉलेजों में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन होना चाहिए।” साथ ही कहा कि “इस्लाम में हिजाब की अनिवार्यता कहीं नहीं है।” इसके बाद से मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

3. हलाल मीट विवाद: अप्रैल की शुरुआत में गुड़ी पड़वा पर्व के दौरान हलाल मीट का विवाद उठा था। हिंदू नव वर्ष के दौरान कुछ संगठनों ने कर्नाटक में हलाल मीट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि “अगर इसे बंद नहीं किया गया तो जबरदस्ती दुकानें बंद करवा दी जाएंगी। जानवरों को तड़पाकर मारा जाता है। इस तरह से मारे गए जानवरों का मांस अशुद्ध होता है और उसे देवी-देवताओं को नहीं लगाया जा सकता है।”

4. लाउडस्पीकर विवाद: इस विवाद पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि “हम महाराष्ट्र में दंगे नहीं चाहते। नमाज अदा करने का किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन अगर आप अजान के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हैं, तो हम भी हनुमान चालीसा के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करेंगे। मुसलमानों को समझना चाहिए कि धर्म कानून से बड़ा नहीं है। तीन मई के बाद, मैं देखूंगा कि क्या करना है।”

उनके इस बयान के बाद से ही लाउडस्पीकर का विवाद तेज हो गया और देशभर में मस्जिदों से लाउडस्वीकर हटाए जाने की मांग उठने लगी। साथ ही कहा गया की अगर मस्जिदों से लाउडस्वीकर नहीं हटे तो अन्य धर्मों के लोग भी हर रोज लाउडस्वीकर पर पूजा-पाठ करने लगेंगे।

5. बुलडोजर: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों, गुंडो और बदमाशों के घरों पर बुलडोजर चलवा रहे थे। लेकिन दिल्ली के जहांगीरपुरी में 16 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव के दौरान निकाली जा रही शोभा यात्रा पर पथराव हुआ था। जिसके बाद से अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चला और यह सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया। राजस्थान के अलवर में 300 साल पुराने मंदिर पर बुलडोजर चलने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई। अब मांग उठ रही है कि बुलडोजर चलाने से पहले सुप्रीम कोर्ट से आदेश लिया जाए।

6. हनुमान चालीसा विवाद: लाउडस्पीकर विवाद के साथ-साथ हनुमान चालीसा को लेकर भी विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया। 24 अप्रैल को महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा ने ऐलान किया था कि “वह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगी।” नवनीत के साथ उनके विधायक पति रवि राणा ने भी यही बात कही। उनके मातोश्री पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवसैनिक उनके घर पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। नवनीत और रवि राणा को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला अभी कोर्ट में है और राणा दंपति जेल में।

7. बाइबिल विवाद: किताब, हिजाब और हलाल विवाद के बाद कर्नाटक अब बाइबिल पर विवाद शुरू हो गया है। बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल प्रबंधन ने आदेश जारी कर कहा है कि “स्कूल में बच्चों को बाइबिल लाना जरूरी है।” स्कूल के इस फैसले का हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल प्रशासन ने स्टूडेंट्स के पेरेंट्स से एक एप्लिकेशन फॉर्म पर वचन लिया है कि “वे अपने बच्चों को बाइबिल स्कूल लाने पर आपत्ति नहीं जताएंगे।” स्कूल के इस फैसले को हिंदू संगठनों ने एजुकेशन एक्ट का उल्लंघन बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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Vaibhav Shukla
Research, Write and Report – that’s my job | Sports Enthusiast | Working With @IndiaNews_itv @itvnetworkin | Life is Pareto 80/20
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