पृथ्वी का प्राचीन जीपीएस, 97 मिलियन साल पुरानी नेविगेशन प्रणाली, इंसानों से पहले डायनासोर करते थे इस्तेमाल
Earth’s Oldest GPS: वैज्ञानिकों ने दावा करते हुए बताया कि डायनासोर धरती के चुंबकीय क्षेत्र को एक प्राचीन ‘जीपीएस’ की तरह इस्तेमाल करते थे. जहां, लगभग 97 मिलियन साल पुरानी यह नेविगेशन प्रणाली उन्हें दिशा खोजने और लंबी यात्राओं के दौरान सटीक स्थान तक पहुंचने में बेहद ही मदद करती थी. दरअसल, यह खोज साबित करती है कि प्रकृति ने इंसानी तकनीक से करोड़ों साल पहले ही एक नेविगेशन नेटवर्क विकसित कर लिया था.
97 मिलियन साल पुरानी खोज
वैज्ञानिकों ने दावा करते हुए कहा कि कि यह प्रणाली क्रिटेशियस काल के दौरान भी सक्रिय थी.
चुंबकीय नेविगेशन
दरअसल, यह आधुनिक जीपीएस की तरह काम नहीं करती थी, बल्कि धरती के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) पर ही पूरी तरह से आधारित थी.
डायनासोरों का दिशा-ज्ञान
तो वहीं, इस प्रणाली की मदद से डायनासोर खाने और पीने के लिए हजारों किलोमीटर का रास्ता बिना भटके पूरी तरह से तय कर लेते थे.
आंतरिक कंपास
हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि कई डायनासोर प्रजातियों के मस्तिष्क या फिर आंखों में ऐसे विशेष ऊतक थे जो चुंबकीय तरंगों को महसूस करने का काम करते थे.
हड्डियों में छिपे राज
इसके अलावा जीवाश्मों (Fossils) के अध्ययन से यह पता चला है कि कुछ डायनासोरों की खोपड़ी में आयरन-आधारित खनिज थे, जो कंपास की सुई की तरह काम करते थे.
लंबी दूरी का प्रवास
इतना ही नहीं, यह प्रणाली लंबी दूरी तय करने वाले विशालकाय शाकाहारी डायनासोरों के लिए जीवन रेखा के तरह बेहद ही आसानी से काम करती थी.
प्रकृति का जाल
धरती के अंदर पिघले हुए लोहे से उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र ही वह 'सॉफ्टवेयर' था जिसने इस जीपीएस को चलाने का कान किया था.
आधुनिक युग से संबंध
आज भी पक्षी और समुद्री कछुए इसी 97 मिलियन साल पुरानी प्राकृतिक प्रणाली का इस्तेमाल करके नेविगेशन करते हैं.