<
Categories: दिल्ली

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के सामने दिल्लीवाले ‘बेबस’ आखिर कौन ले रहा हर साल हजारों लोगों की जान?

दिल्ली की हवा अक्सर लोकल एमिशन के बिना भी जहरीली हो जाती है क्योंकि PM 2.5 सांद्रता वाले सेकेंडरी पॉल्यूटेंट यहां के वातावरण में हमेशा विद्यमान रहते हैं. दिल्ली NCR में व्याप्त वायु प्रदूषण का एक-तिहाई हिस्सा इन्हीं सेकेंडरी पॉल्यूटेंट से आता है.

दिल्ली प्रदूषण को लेकर हमेशा चर्चा में बनी रहती है. हाल ही में दिल्ली सरकार ने GRAP IV लागू किया, लेकिन इससे भी प्रदूषण कंट्रोल करने में कोई विशेष राहत नहीं मिली. राजधानी में अभी भी स्मॉग की समस्या बनी हुई है. 
दरअसल, दिल्ली की हवा अक्सर लोकल एमिशन के बिना भी जहरीली हो जाती है क्योंकि PM 2.5 सांद्रता वाले सेकेंडरी पॉल्यूटेंट यहां के वातावरण में हमेशा विद्यमान रहते हैं. दिल्ली NCR में व्याप्त वायु प्रदूषण का एक-तिहाई हिस्सा इन्हीं सेकेंडरी पॉल्यूटेंट से आता है. 

प्रदूषण से होने वाली मृत्यु दर में हुआ इजाफा

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में राजधानी में 17,188 लोगों की मौतें सीधे तौर पर वायु प्रदूषण की वजह से हुई है. इसका अर्थ ये हुआ कि हर सात मरने वाले व्यक्तियों में से एक के मौत की वजह प्रदूषण है. इसी तरह सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार साल 2023 में दिल्ली में 15% मृत्यु प्रदूषण की वजह से हुई थी. हालांकि 2024 और 2025 के आंकड़े अभी सामने नहीं आये हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि राजधानी में प्रदूषण से होने वाली मृत्यु दर में वृद्धि हुई है. इन परिस्थतियों में सेकेंडरी पॉल्यूटेंट के उत्सर्जन को नियंत्रित करना और भी जरूरी हो जाता है.

सेकेंडरी एरोसोल की परिभाषा

सेकेंडरी एरोसोल दिल्ली के सालाना PM 2.5 लोड का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बनाते हैं. ये एरोसोल मुख्य रूप से अमोनियम सल्फेट के रूप में वातावरण में विद्यमान होते हैं.  ये कण तब बनते हैं जब सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) जैसी प्राइमरी गैसें एटमॉस्फियर में ऑक्सीडाइज होती हैं और खेती या दूसरे सोर्स से निकलने वाली अमोनिया के साथ रिएक्ट करती हैं. गाड़ियों या धूल से निकलने वाले सीधे एमिशन के उलट, ये पॉल्यूटेंट लंबी दूरी तय करते हैं, जिससे ट्रांसबाउंड्री पॉल्यूशन के जरिए राजधानी में स्मॉग की खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो जाती है. 

कोयला पावर प्लांट की भूमिका

भारत, जो दुनिया में SO₂ का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, कोयले से चलने वाले प्लांट पर बहुत ज्यादा निर्भर है. ये प्लांट देश के SO₂ एमिशन में 60% से ज़्यादा का योगदान देते हैं. जो पॉवर प्लांट अक्सर दिल्ली से 300 km के दायरे में होते हैं, वे राजधानी के प्रदूषण को गंभीरता से प्रभावित करते हैं. ये पावर प्लांट SO₂, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट छोड़ते हैं जो सल्फेट और नाइट्रेट जैसे सेकेंडरी PM2.5 में बदल जाते हैं. 2025 में, ऐसे 78% प्लांट में अनिवार्य फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) सिस्टम नहीं थे, जिससे यह समस्या और बढ़ गई.
पावर प्लांट से निकलने वाला SO₂ ऑक्सीडाइज़ होकर सल्फेट बनता है, फिर फर्टिलाइज़र, पशुधन, या बायोमास जलाने से निकलने वाली अमोनिया के साथ मिलकर बारीक, हवा में मौजूद अमोनियम सल्फेट में परिवर्तित हो जाता है. यह प्रक्रिया मॉनसून के बाद और सर्दियों में स्थिर हवा और कम तापमान में बदलाव के कारण चरम पर होती है, जिससे ये कण हवा में लटके रहते हैं और स्मॉग का निर्माण करते हैं. CREA के 2024 के सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ (42%) और उत्तर प्रदेश जैसे आस-पास के राज्यों का सेकेंडरी पॉल्यूटेंट के उत्सर्जन में बड़ा योगदान है.

क्षेत्रीय और मौसमी प्रभाव

PM2.5 सांद्रता वाले सेकेंडरी पॉल्यूटेंट लोकल समाधानों के लिए एक चुनौती है, क्योंकि यह दिल्ली से दूर उद्योगों, रिफाइनरियों और भट्टियों से होने वाले एमिशन को नजरअंदाज करता है. सर्दियों में आग जलाने (तापने के लिए) या पराली जलाने से बायोमास (PM2.5 का 24%) जैसे लोकल सोर्स से उत्सर्जन बढ़ता है, लेकिन सेकेंडरी एरोसोल इस उत्सर्जन पर कहीं अधिक हावी हैं. विशेषज्ञ नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम को रिवाइज करने का आग्रह करते हैं ताकि क्षेत्रीय नियंत्रण और सख्त मंज़ूरी के ज़रिए इन्हें टारगेट किया जा सके.

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

Recent Posts

शादी के 9 साल भी ये भोजपुरी एक्ट्रेस नहीं बन पाईं मां, बेबी प्लानिंग पर भी की बात

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अपने करियर के साथ ही अपनी लाइफ के लिए भी चर्चा में…

Last Updated: March 10, 2026 23:09:31 IST

यूट्यूब वीडियो देख बदल डाली प्रोडक्ट्स की एक्सपायरी डेट; 12,000 कार्टन एक्सपायर्ड सामान बरामद, ऐसे फूटा भंडा!

YouTube से सीखा एक्सपायरी डेट बदलने का खेल! जयपुर में 1.5 लाख किलो सामान के…

Last Updated: March 10, 2026 23:02:03 IST

फ्रिज में रखा चावल, खाना सही है या हो सकता है नुकसान, बासी चावल कब तक सुरक्षित है

Stale Rice: फ्रिज में रखा चावल खाना सुरक्षित है या नहीं? दिन के बचे हुए…

Last Updated: March 10, 2026 22:34:19 IST

रोज केला खाने से क्या होता है? शरीर के किन हिस्सों को मिलता है फायदा, एक्सपर्ट ने बताया

Bananas Benefits: केला कई पोषक तत्वों से भरपूर फल होता है. रोज केला खाने से…

Last Updated: March 10, 2026 22:29:34 IST

दिल्ली में मशहूर यूट्यूबर और व्यापारी की संदिग्ध मौत: 31 वर्षीय आकाश का खाली प्लॉट में मिला शव, लाखों का कैश गायब!

मंडावली के मशहूर यूट्यूबर और व्यापारी आकाश की संदिग्ध मौत! घर से 1.5 लाख कैश…

Last Updated: March 10, 2026 22:18:03 IST

Rahul Bhatia Net Worth: कौन हैं राहुल भाटिया? इंडिगो के CEO के इस्तीफे के बाद संभाली कमान, शाहरुख के अंदाज में कहा ‘मैं हूं ना’!

Who is Rahul Bhatia: कौन हैं राहुल भाटिया? इंडिगो के संकटमोचक जिन्होंने CEO पीटर एल्बर्स…

Last Updated: March 10, 2026 21:24:31 IST