AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को देखत हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए सामग्री और डीपफेक कंटेंट को लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के लिए कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं. इस नए प्रावधानों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक या फर्जी AI कंटेंट सिर्फ 3 घंटे के भीतर हटाना होगा. जो कि पहले 36 घंटे का समय सीमा था. आखिर नए नियम और क्या-क्या हैं. यह नियम किसके लिए है और यूजर्स पर क्या असर पड़गा आदि. यहां जानिए, इस नए AI-डीपफेक कंटेंट से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब. AI पर सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न
डीपफेक क्या होता है?
डीपफेक एक तरह नकली फोटो, वीडियो या ऑडियो होता है, जिसे AI तकनीक से बनाया जाता है. यह असली जैसा दिखता है, लेकिन वास्तव में नकली होता है.
सरकार के नए नियम कब से लागू होंगे?
सरकार द्वारा लागू किया गया यह नया नियम 20 फरवरी से देशभर में लागू हो जाएंगे.
नया बदलाव क्या है?
आपत्तिजनक या डीपफेक कंटेंट को अब 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा.
पहले कंटेंट को कितने समय सीमा में हटाना होता था?
पहले कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय सीमा दिया जाता था.
कौन-कौन से प्लेटफॉर्म्स पर इस नियम को लागू किया जाएगा?
इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, X (ट्विटर) सहित सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस नए नियम को लागू किया जाएगा.
किस तरह का कंटेंट हटाना है?
अपने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म से डीपफेक, मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो, फर्जी बयान, आपत्तिजनक ऑडियो वीडियो और कानून-विरुद्ध कंटेंट सामग्री को हटाना है.
क्या AI से बने सभी तरह के कंटेंट प्रतिबंधित है?
ऐसा नहीं है, सिर्फ मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो ऑडियो जैसी चीजें प्रतिबंधित है. जिसकी वजह से सोशल मीडिया के द्वारा गलत जानकारियां पहुंचती है.
AI कंटेंट में लेबलिंग क्यों जरूरी है?
लेबलिंग जरूरी करने का मकसद सिर्फ यहीं है कि सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा पता लगाया जा सके कि कंटेंट असली है या AI से तैयार किया गया है.
सरकार के इस नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
सरकार के इस नियमों का उल्लंघन करने पर प्लेटफॉर्म पर जुर्माना होगा या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.