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श्रीलंका ने चीन के जासूसी जहाज को दी हंबनटोटा बंदरगाह पर आने की मंजूरी

Naresh Kumar • LAST UPDATED : August 13, 2022, 10:27 pm IST
  • 16 से 22 अगस्त तक हंबनटोटा में रहेगा युआन वांग-5

इंडिया न्यूज, New Delhi News। Yuan Wang-5 : चीन का स्पाई शिप अब श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह जाएगा। इसके लिए श्रीलंका ने चीन को मंजूरी भी दे दी है। यही नहीं यह चीनी शिप 6 दिन तक वहां पर रहेगा। वहीं इसके बाद से भारतीय नौसेना और इसरो की चिंताएं बढ़ गई हैं। क्योंकि चीन का यह युआन वांग-5 नाम का शिप जासूसी में काफी पारंगत है।

बता दें कि चीन का यह स्पाई शिप करीब 750 किमी दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। हंबनटोटा पोर्ट से तमिलनाडु के कन्याकुमारी की दूरी करीब 451 किलोमीटर है। जासूसी के खतरे को देखते हुए ही भारत ने श्रीलंका से इस शिप को हंबनटोटा में एंट्री न देने को कहा था।

विदेश मंत्रालय से मिली मंजूरी : श्रीलंकन बंदरगाह मास्टर

श्रीलंका के बंदरगाह मास्टर निर्मल पी सिल्वा का कहना है कि उन्हें 16 से 22 अगस्त तक हंबनटोटा में जहाज को बुलाने के लिए विदेश मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है। विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सरकार ने यात्रा के लिए नए सिरे से अनुमति दी थी, ये उस समय की बात है जब श्रीलंका में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर थे। जिसके बाद पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए।

कितना खतरनाक है चीनी शिप युआन वांग-5

बता दें कि भारत की चिंता का कारण जासूसी का डर है। क्योंकि चीन का यह जासूसी शिप युआन वांग-5 को स्पेस और सैटेलाइट ट्रैकिंग में महारत हासिल है। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है।

PLA की SSF आपरेट करती है इस शिप को

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस शिप को PLA की स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स यानी SSF आपरेट करती है। SSF थिएटर कमांड लेवल का आगेर्नाइजेशन है। यह PLA को स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक, इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और साइकोलॉजिकल वारफेयर मिशन में मदद करती है।

इंडियन नेवी की पैनी नजर

पहले इस चीनी शिप के 11 अगस्त को हंबनटोटा पहुंचने की उम्मीद थी। भारत ने इस स्पाई शिप को लेकर श्रीलंका के सामने विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद श्रीलंका ने इसे हंबनटोटा पोर्ट पर आने की अनुमति दे दी है। भारत इसको लेकर अलर्ट पर है। शिप के मूवमेंट पर इंडियन नेवी की कड़ी नजर है।

पैराबोलिक ट्रैकिंग एंटीना और सेंसर्स से लैस है युआन वांग-5

युआन वांग-5 मिलिट्री नहीं बल्कि पावरफुल ट्रैकिंग शिप है। ये शिप अपनी आवाजाही तब शुरू करते हैं, जब चीन या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है। यह शिप लगभग 750 किलोमीटर दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। 400 क्रू वाला यह शिप पैराबोलिक ट्रैकिंग एंटीना और कई सेंसर्स से लैस है।

भारत की जासूसी के लिए ही भेजा जा रहा श्रीलंका : एक्सपर्ट

हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचने के बाद इस शिप की पहुंच दक्षिण भारत के प्रमुख सैन्य और परमाणु ठिकाने जैसे कलपक्कम, कुडनकुलम तक होगी। साथ ही केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई पोर्ट यानी बंदरगाह चीन के रडार पर होंगे। कुछ एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि चीन भारत के मुख्य नौसैना बेस और परमाणु संयंत्रों की जासूसी के लिए इस जहाज को श्रीलंका भेज रहा है।

इसरो को लॉन्चिंग केंद्र की जासूसी का खतरा

शिप में हाई-टेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट (छिपकर सुनने वाले उपकरण) लगे हैं। यानी श्रीलंका के पोर्ट पर खड़े होकर यह भारत के अंदरूनी हिस्सों तक की जानकारी जुटा सकता है। साथ ही पूर्वी तट पर स्थित भारतीय नौसैनिक अड्डे इस शिप की जासूसी के रेंज में होंगे।

चुरा सकता है अहम जानकारियां

कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि चांदीपुर में इसरो का लॉन्चिंग केंद्र की भी इससे जासूसी हो सकती है। इतना ही नहीं देश की अग्नि जैसी मिसाइलों की सारी सूचना जैसे कि परफॉर्मेंस और रेंज के बारे में जानकारी चुरा सकता है।

31 जुलाई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि हमें अगस्त में इस शिप के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचने की खबर मिली है। भारत सरकार देश की सिक्योरिटी और इकोनॉमिक इंटरेस्ट को देखते हुए हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और उनकी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।

चीन ने 99 साल की लीज पर लिया है हंबनटोटा पोर्ट

चीनी जासूसी शिप युआन वांग-5, 13 जुलाई को जियानगिन पोर्ट से रवाना हुआ था और जल्द ही श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचेगा। हंबनटोटा में यह एक हफ्ते तक रहेगा। इस पोर्ट को चीन ने श्रीलंका से 99 साल की लीज पर लिया है।

श्रीलंकाई नौसेना के साथ अभ्यास के लिए पहुंचा पाकिस्तानी युद्धपोत

वहीं, दूसरी ओर चीन में बना पाकिस्तान का युद्धपोत पीएनएस तैमूर कोलंबो बंदरगाह पहुंच गया। यह पश्चिमी सागर में श्रीलंकाई नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास करेगा। पाकिस्तानी का यह युद्धपोत 15 अगस्त तक कोलंबो तट पर रहेगा। दोनों देशों की ओर से कहा जा रहा है कि यह युद्धपोत आपसी सहयोग और सद्भावना बढ़ाने के लिए श्रीलंकाई नौसेना की ओर से आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा।

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