भगवद गीता के 5 सबसे शक्तिशाली श्लोक और उनके अर्थ

भगवद गीता भारतीय महाकाव्य महाभारत का एक हिस्सा है। जानते हैं इसके 5 सबसे शक्तिशाली श्लोक के बारे में 

किसी को अपने कर्तव्यों को पूरा करने का अधिकार है, लेकिन वह उन कार्यों के फल का 'हकदार' नहीं है।

1.कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

 'मैं सभी आध्यात्मिक और भौतिक का स्रोत हूं और जो कुछ भी मौजूद है वह मुझसे ही निकलता है।'

2.अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते

मैं सभी प्राणियों के हृदय में हूं, या मैं सभी प्राणियों के हृदय में रहता हूं। 

3.अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थित:

जब भी धर्म या धार्मिकता में गिरावट आएगी और दुष्कर्मों में वृद्धि होगी, मैं इसे खत्म करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लूंगा।

4. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत! अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्

 क्रोध में विनाश की शक्ति होती है क्योंकि क्रोध के साथ भ्रम, धुंधली यादें और तर्कसंगत सोच की हानि आती है।

5. क्रोधाद्भवति सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम: | स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति

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