ईरान तनाव के बीच बड़ा गेम! भारत-चीन रिश्तों में गर्माहट, 6 साल बाद खुला रास्ता जानें नेपाल की चिंता क्यों बढ़ी?

ईरान तनाव के बीच बड़ा गेम! भारत-चीन रिश्तों में गर्माहट, 6 साल बाद खुला रास्ता जानें नेपाल की चिंता क्यों बढ़ी?

लिपुलेख दर्रा (Lipulekh Pass) भारत-चीन-नेपाल के ट्राई-जंक्शन (तीनों देशों की सीमा) पर स्थित एक अहम रणनीतिक और व्यापारिक रास्ता है.

भारत और चीन के बीच इस रास्ते से करीब 6 साल बाद व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है.

यह व्यापार 2020 में कोविड और सीमा तनाव के कारण बंद हो गया था.

यह मार्ग ऐतिहासिक रूप से पुराना ट्रेड रूट (1954 से) रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क होता रहा है.

नेपाल इस पर आपत्ति जता रहा है, क्योंकि वह लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है.

भारत का कहना है कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह क्षेत्र भारत का हिस्सा है.

विवाद की जड़ 1816 की सुगौली संधि और काली नदी की असली उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग व्याख्या है.

इस रूट के फिर से खुलने से उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था और व्यापार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

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