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माघ माह में क्यों नहीं खानी चाहिए मूली? जानें पीछे का रहस्य

माघ माह में क्यों नहीं खानी चाहिए मूली? जानें पीछे का रहस्य

माघ माह को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और खास माना जाता है और इस महीने में भगवान विष्णु के वासुदेव रूप की पूजा होती है.

माघ का महीने दान और पवित्र स्नान के लिए खास होता है और इस माह में उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने का भी महत्व है.

लेकिन इस माह में कुछ विशेष चीजों के भी त्याग किया जाता है, जैसे कि मूली का सेवन माघ के महीने में वर्जित होता.

मान्यताओं के अनुसार माघ माह में मूली का सेवन'मद्य' यानी शराब के सेवन करने के समान माना जाता है और उसी के समान दोष लगता है.

शास्त्रों में भी उल्लेख किया गया है कि इस माघ माह में जो व्यक्ति मूली खाता है उसे अपने आध्यात्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता.

क्योंकि माघ का महीना आत्म-शुद्धि और भगवान विष्णु की आराधना का होता है, इसलिए सात्विक भोजन करवना इस माह में जरूरी होता है.

माघ माह में मूली को इसलिए तामसिक श्रेणी में रखा गया है, क्योंंकि यह मन की एकाग्रता को भंग करती है.

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ में मूली का सेवन करने से व्यक्ति के पुण्य कर्म पापों में बदल जाते हैं.

इसके अलावा एकादशी और प्रतिपदा तिथि के दिन भी मूली नहीं खानी चाहिए, इन तिथियों पर मूली का सेवन करने से धन की हानि होती है.

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