तवायफों की जिंदगी ऐशो-आराम से भरी होती थी और उनके पास बेशुमार दौलत होती थी।
तवायफें महंगे शौक रखती थीं और उनके पास रानियों जैसे भारी गहने होते थे।
तवायफें अपनी जिंदगी में कुछ काम नहीं कर सकती थीं, जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना।
सनातन परंपरा के अनुसार तवायफों को परिवार के पूजा, संस्कार और धार्मिक कार्यों में शामिल होने की अनुमति नहीं होती थी।
तवायफों को शादी, बच्चे के जन्म, और समाज के प्रतिष्ठित लोगों की मौत के बाद के संस्कारों में भी शामिल नहीं किया जाता था।
इन पाबंदियों के बावजूद, तवायफों को समाज में कला और संस्कृति के संरक्षक के रूप में माना जाता था।
तवायफों के कोठे पर कला, संस्कृति और अदब का संरक्षण होता था और वहां की दुनिया गुलजार रहती थी।
Disclaimer: इंडिया न्यूज़ इस लेख में सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए बता रहा हैं। इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।