जहां देश प्रतिपदा को होली खेलता है, वहीं भीमापार गांव में द्वितीया तिथि को उत्सव मनाया जाता है.
प्राचीन समय में ग्रामीण होली पर जमींदारों के यहां चले जाते थे, इसलिए अगले दिन गांव में होली खेली जाती है.
किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या संत के निधन की वजह से परंपरा बदलने की मान्यता मानी जाती है.
परंपरा बदलने की कोशिश करने पर गांव में अशुभ घटनाएं घटने का डर भी बना रहता है.
होली के दिन गांव में इतना जोश और हुड़दंग होता है कि सभी रास्ते बंद कर दिए जाते हैं.
हुड़दंग को नियंत्रित करने के लिए गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती भी की जाती है.
अनजान व्यक्ति के प्रवेश पर उसे रंगों से सराबोर कर दिया जाता है, जिससे ट्रैफिक रुक जाता है.