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महाकुंभ में आपनी किताबो को जलाने को लेकर आचार्य प्रशांत ने खोले दिए कई राज, देंखे

BY: Prakhar Tiwari • LAST UPDATED : January 19, 2025, 9:13 pm IST
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महाकुंभ में आपनी किताबो को जलाने को लेकर आचार्य प्रशांत ने खोले दिए कई राज, देंखे

India News (इंडिया न्यूज),Acharya Prashant:अपने किताबों  को महाकुंभ में जलाने को लेकर अचार्य प्रशांत ने इंडिया न्यूज केएडिटर एंड चीफ राणा यशवंत से बातचीत की। जहां उन्होने कई मुद्दे पर बात की। महाकुंभ में आपनी किताबो को जलाने को लेकर आचार्य प्रशांत ने कहा कि हम नालंदा की बात करते है खिलजी की बात करते है उसने नांलदा आकर विशाल पुस्तक सग्रह था उसको जला दिया। और ये कहा जाता है कि वो किताबे हफ्तो नहीं महीनो तक जलती रहीं थी। हम सब लोग उसको भारत के दुर्भाग्य और अत्याचार के तौर पर देखते है। दर्शन और धर्म की किताबो को विर्धमीयो ने आके जला दिया। और ये कितनी विडबना और भयानक दुख की बात है कि महांकुभ जैसे पावन पर्व पर गंगा नदी के तट पर श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गा सप्तशती, हे राम,शिव शूत्र भास्य, का सकलन है।

अत्याचार के तौर पर देखते

अपने किताबों  को महाकुंभ में जलाने को लेकर अचार्य प्रशांत ने इंडिया न्यूज केएडिटर एंड चीफ राणा यशवंत से बातचीत की। जहां उन्होने कई मुद्दे पर बात की। महाकुंभ में आपनी किताबो को जलाने को लेकर आचार्य प्रशांत ने कहा कि हम नालंदा की बात करते है खिलजी की बात करते है उसने नांलदा आकर विशाल पुस्तक सग्रह था उसको जला दिया। और ये कहा जाता है कि वो किताबे हफ्तो नहीं महीनो तक जलती रहीं थी। हम सब लोग उसको भारत के दुर्भाग्य और अत्याचार के तौर पर देखते है। दर्शन और धर्म की किताबो को विर्धमीयो ने आके जला दिया। और ये कितनी विडबना और भयानक दुख की बात है कि महांकुभ जैसे पावन पर्व पर गंगा नदी के तट पर श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गा सप्तशती, हे राम,शिव शूत्र भास्य, का सकलन है।

500 पुस्तको को जलाया

उन्होने आगे कहा कि इन पुस्तको को और ऐसी 500 पुस्तको को जलाया जा रहा है। और सारी की सारी पुस्तके धार्मिक और अधार्मिक है। जो ये पिक्चर है महाकुंभ में गंगा के किनारे धार्मिक किताबे जलाई जा रही है। इस तस्वीर से ही सब कुछ पता चल रहा है कि चल क्या रहा है।चल रहा है ये है कि वास्तिवक धर्म है जो उसको प्रचलित धर्म लोक धर्म है उसको स्वीकार नहीं कर पा रहा है। आम आदमी जिसको धर्म बोल रहा है उसको धर्म के नाम पर बहुत गलत चीचे पढ़ा दी गई है। आम आदमी के साथ धोखा हुआ है उसको असली धर्म से बहुत दूर कर दिया गया है। हमारा वैदिक धर्म है वेद और उपनिषद ब्रहमसूत्र और भगवत गीता हमारी प्रस्तान रही में आते है।

हर हफ्ते देखने को मिलते है

अचार्य प्रशांत ने आगे कहा कि अगर वैदिक हमारा धर्म है तो वास्तविक सनातनी वो हुआ जिसको वेदांत का ज्ञान हो और आज जो लोग अपने आप को हिंदू बोल रहे है उनके लिए धर्म का मतलब हो गया है अंध विश्वास और बहुत सी बिखरी हुई मान्यताए और बहुत क्षेत्रीय किस्म के कर्म कांड तो उन तक जब सनातन शुद रुप से ले जाने का प्रयास होता है तो लोग उग्र हो जाते है। कयो कि वो दिल से धार्मिक है नहीं है तो कई प्रकार की सांजिसे करने से कतराते नहीं है वैसा ही प्रकरण हमको प्रयाग में देखनो को मिला जब धार्मिक पुस्तको का वहां पर गहन किया गया।क्यो गहन किया गया क्यो कि किताबे है हिंदू को सच्चे धर्म के पास ले जा रही थी उन किताबो से जो झूठे धर्म की दुकान खोल कर बेैठे है उनको खतरा तो वो आक्रमण करते है तो यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। हां यह थोड़ा ज्यादा नाटकीय और डैमटिक है क्यो कि इशके इर्द गिर्द जो स्थितिया है वो बड़ी जबसदस्त है क्यो कि महांकुभ है प्रयागराज और वहा पर किताबे जलाई जा रही है। इस तरह के हमले हर हफ्ते देखने को मिलते है।

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