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Parikrama ke Niyam: किस देवता की कितनी परिक्रमा करें? क्या कहते हैं शास्त्र, जानें सही नियम

Parikrama ke Niyam: मंदिर में परिक्रमा करना हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं किस देवता की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए. इसे लेकर कई लोग बहुत असमंजस में रहते हैं. जानिए सही नियम क्या होता है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: March 14, 2026 16:18:29 IST

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Parikrama ke Niyam: हममें से कई लोग देवताओं के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं. दर्शन के बाद लोग देवताओं की परिक्रमा करते हैं. मंदिर का प्रांगण हो या फिर पूजनीय पेड़ और पौधे, सभी लोग अपने हिसाब से उनकी परिक्रमा करते हैं. 1 से लेकर 108 तक जिसका जितना सामर्थ्य बनता है, वह अपनी सामर्थ के अनुसार आस्था को प्रकट करने के लिए परिक्रमा में जुट जाता है. लेकिन इससे पहले आपको जानना चाहिए, कि किस देवता की कितनी बार परिक्रमा करें.

किस देवता की कितनी परिक्रमा करें?

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की आधी, भगवान श्री गणेश जी की तीन, माता पार्वती या फिर किसी अन्य देवी की एक परिक्रमा करें, श्री हरि यानि भगवान विष्णु और उनके तमाम अवतारों की चार बार परिक्रमा, हनुमान जी की तीन ​परिक्रमा, सूर्य देव की सात वट सावित्री व्रत के दौरान वट वृक्ष की 108 परिक्रमा, पीपल के पेड़ की भी 108 परिक्रमा का विधान है. यदि आप इतनी परिक्रमा न कर पाएं तो एक अथवा विषम संख्या में 3, 5, 7, 9 आदि कर सकते हैं. 

परिक्रमा कैसे करें?

भगवान के पूजा के दौरान सच्चे मन से परिक्रमा करनी शुभ मानी जाती है. घड़ी की दिशा में परिक्रमा लगानी शुभ होती है. इस दौरान भगवान का ध्यान करना चाहिए और परिक्रमा मंत्र का जाप करनी चाहिए. सनातन धर्म में एसी मान्यता है कि परिक्रमा लगाने से किसी भी इंसान को सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है और नकारत्मक ऊर्जा दूर चली जाती है.

मूर्ति के पीछे जगह न होने पर कैसे करें परिक्रमा

कई जगहों पर कई बार कुछ मंदिरों या फिर तीर्थ स्थान पर देवी-देवताओं की मूर्ति के पीछे जाने की जगह नहीं बनी होती है. तब हमारे सामने परेशानी आ जाती है.

हिंदू मान्यताओं के अनुसार जब किसी भी देवी-देवता के चारों ओर परिक्रमा लगाना संभव नहीं होता है तो जिस स्थान पर पूजा कर रहे हों वहीं पर दाहिनी हाथ की तरफ घड़ी की सुईयों की तरह पूरा एक चक्कर खड़े-खड़े लगाना लेना चाहिए. 

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Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: March 14, 2026 16:18:29 IST

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Parikrama ke Niyam: हममें से कई लोग देवताओं के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं. दर्शन के बाद लोग देवताओं की परिक्रमा करते हैं. मंदिर का प्रांगण हो या फिर पूजनीय पेड़ और पौधे, सभी लोग अपने हिसाब से उनकी परिक्रमा करते हैं. 1 से लेकर 108 तक जिसका जितना सामर्थ्य बनता है, वह अपनी सामर्थ के अनुसार आस्था को प्रकट करने के लिए परिक्रमा में जुट जाता है. लेकिन इससे पहले आपको जानना चाहिए, कि किस देवता की कितनी बार परिक्रमा करें.

किस देवता की कितनी परिक्रमा करें?

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की आधी, भगवान श्री गणेश जी की तीन, माता पार्वती या फिर किसी अन्य देवी की एक परिक्रमा करें, श्री हरि यानि भगवान विष्णु और उनके तमाम अवतारों की चार बार परिक्रमा, हनुमान जी की तीन ​परिक्रमा, सूर्य देव की सात वट सावित्री व्रत के दौरान वट वृक्ष की 108 परिक्रमा, पीपल के पेड़ की भी 108 परिक्रमा का विधान है. यदि आप इतनी परिक्रमा न कर पाएं तो एक अथवा विषम संख्या में 3, 5, 7, 9 आदि कर सकते हैं. 

परिक्रमा कैसे करें?

भगवान के पूजा के दौरान सच्चे मन से परिक्रमा करनी शुभ मानी जाती है. घड़ी की दिशा में परिक्रमा लगानी शुभ होती है. इस दौरान भगवान का ध्यान करना चाहिए और परिक्रमा मंत्र का जाप करनी चाहिए. सनातन धर्म में एसी मान्यता है कि परिक्रमा लगाने से किसी भी इंसान को सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है और नकारत्मक ऊर्जा दूर चली जाती है.

मूर्ति के पीछे जगह न होने पर कैसे करें परिक्रमा

कई जगहों पर कई बार कुछ मंदिरों या फिर तीर्थ स्थान पर देवी-देवताओं की मूर्ति के पीछे जाने की जगह नहीं बनी होती है. तब हमारे सामने परेशानी आ जाती है.

हिंदू मान्यताओं के अनुसार जब किसी भी देवी-देवता के चारों ओर परिक्रमा लगाना संभव नहीं होता है तो जिस स्थान पर पूजा कर रहे हों वहीं पर दाहिनी हाथ की तरफ घड़ी की सुईयों की तरह पूरा एक चक्कर खड़े-खड़े लगाना लेना चाहिए. 

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