Middle Class Challenges: भारत में आज भी ऐसी एक बड़ी संख्या है, जो केवल 25000 रुपये प्रति महीने से नीचे कमाता है. बहुत से लोग 2 लाख सैलेरी होने का ख्वाब देखते हैं. 2 लाख रुपये प्रतिमाह सैलरी सुनने में कितना अच्छा लगता है. लेकिन, क्या वाकई एक परिवार के लिए 2 लाख रुपये में मेट्रो सिटीज जैसे दिल्ली, मुंबई और बैंगलुरू आदि जैसे शहरों में सफर करना आसान है. हालांकि, महंगाई और खर्च इतने बढ़ गए हैं कि अगर आप 2 लाख रुपये महीना भी कमा रहे हैं तो उसमें आप केवल गुजर-बसर ही कर पाएंगे.
पैसे की बचत कर पाना आज के समय में कितना मुश्किल साबित हो रहा है. आज भी ऐसे कई मिडल क्लास लोग हैं, जो महंगाई की मार का शिकार हो रहे हैं.
2 लाख में भी पूरे नहीं हो रहे हैं खर्चे
हाल ही में चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक द्वारा सोशल मीडिया पर लिखा गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. कौशिक ने पोस्ट में लिखा कि 2 लाख रुपये मंथली सैलरी होना भी एक मैथेमैटिकल भ्रम है. मेट्रो शहरों में 2 लाख रुपये महीने सैलरी होने के बाद भी परिवारों के लिए यह काफी हो इसकी गारंटी नहीं है. 2 लाख रुपये महीने कमाने वाले लोग भी खुद को अमीर न मानकर केवल गुजर-बसर करने की स्थिति में रख रहे हैं. क्योंकि, एक अच्छी सैलरी आने के बाद भी टैक्स, ईएमआई और स्कूल की फीस आदि चुकानी होती है.
दो हिस्सों में बंटा है मिडल क्लास
कौशिक के मुताबिक मिडल क्लास फैमिली दो हिस्सों में बंट चुकी है. पहला हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और दूसरा हिस्सा बीमारी का इलाज कराना है. प्राइवेट स्कूलों की फीस पिछले 10 सालों में 160 फीसदी तक बढ़ चुकी है, जोकि सैलरी की तुलना में काफी ज्यादा है. वहीं, इलाज यानि मेडिकल खर्च भी हर साल 14 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. यही कारण है कि मिडल क्लास आदमी पैसा नहीं बचा पाता है और उसके बचाए हुए पैसे खर्च हो जाते हैं.
कहां खर्च हो रहे हैं पैसे
24 लाख की सालाना सैलरी होने के साथ-साथ टैक्स, ईएमआई, मेडिकल सर्विस और स्कूल की फीस मिडल क्लास की कमाई का ज्यादा हिस्सा अपनी ओर खींच लेता है. अगर आप दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में रह रहे हैं तो उसका महंगा रेंट भी चुकाना होता है. वहीं, लाइफस्टाइल मेनटेन करने पर भी कमाई का काफी हिस्सा खर्च होता है.