क्या हैं मांगें?
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को 3.0 से बढ़ाकर 3.25 करना है. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने यह प्रस्ताव रखा है. अगर सरकार 3.25 के फिटमेंट फैक्टर को मान लेती है, तो मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹58,500 हो सकती है. इसके अलावा, कर्मचारी 5% सालाना इंक्रीमेंट की भी मांग कर रहे हैं, जो अभी कम है. यूनियनों का तर्क है कि महंगाई के सामने मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर नाकाफी है.
7वें वेतन आयोग में कितना फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था?
7वें वेतन आयोग की तुलना में, उस समय 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय किया गया था. उस समय, इस बढ़ोतरी को काफी महत्वपूर्ण माना गया था, लेकिन अब कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई ने उस बढ़ोतरी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. इसलिए, 8वें वेतन आयोग को मौजूदा आर्थिक स्थिति और आने वाले सालों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए. इस बीच, कर्मचारी यूनियनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए 12 फरवरी, 2026 को एक दिन की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स ने इस संबंध में कैबिनेट सचिव को एक औपचारिक नोटिस सौंपा है. यूनियनों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा. यह हड़ताल सैलरी, पेंशन, सर्विस की शर्तों और लेबर रिफॉर्म से जुड़े मुद्दों को लेकर है.
50% DA को Basic Pay में मिलाने की मांग
कर्मचारियों की मांगों की लिस्ट बहुत लंबी है. इसमें 50% महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में मिलाने, 1 जनवरी, 2026 से 20% अंतरिम राहत, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)/यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) को खत्म करके पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने, COVID-19 के दौरान रोके गए 18 महीने के DA का पेमेंट, कम्यूटेड पेंशन को जल्दी बहाल करने, खाली पदों को भरने और कॉन्ट्रैक्ट लेबर सिस्टम को खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं. इसके अलावा, न्यूनतम पेंशन को ₹9,000 करने, जरूरी चीज़ों से GST हटाने और प्राइवेटाइजेशन का विरोध करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेती है या मामला लंबी बातचीत में फंस जाता है.