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Wedding Jewellery Shopping Planning: शादी के लिए महंगा गोल्ड नहीं बनेगा अड़चन, मार्केट में लाइट वेट गहनों ने बढ़ाई रौनक, जानें हॉलमार्क और जरूरी पहचान

Hallmarking of 9KT Gold: अगर आप शादी केलिए गहने खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सोने के दामों को लेकर टेंशन में हैं. यहां पर हल्के वेट के गहने को लेकर जरूरी जानकारी दी है. इनकी पहचान और जरूरी गाइडलाइन के बारे में जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 30, 2026 12:07:52 IST

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9KT Gold for Wedding Jewellery: शादियों का सीजन नजदीक हैं और सराफा मार्केट में भी चहल-पहल बढ़ने लगी है. भारतीय शादियां परिवार, आस्था और पर्सनल स्टाइल का जश्न होती हैं. ऐसे में गहनों की खरीद को शुभ और जरूरी चीजों में से एक माना जाता है. विवाह में सबसे अहम दुल्हन के लिए खरीदे जाने वाले जेवरात होते हैं. शादी आते ही इन्हें खरीदने की प्लानिंग भी स्टार्ट हो जाती है. हालांकि, सोने के लगातार बढ़ते दामों ने लोगों का बजट भी गड़बड़ कर दिया है. अब ऐसे में एक ऑप्शन सबसे अच्छा माना जा रहा है और वह है लाइट वेट गहने को खरीदना. आइए जानते हैं, यह ग्राहकों की पहली पसंद क्यों बनते जा रहे हैं?

लाइटवेट बने ग्राहकों की पसंद

सोने और चांदी की कीमतों में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में सागर के सुनार मुकेश सोनी ने कहा कि सोना ही एक ऐसा जरिया है, जो निवेश के तौर पर पूरी तरह सुरक्षित रहता है. दाम बढ़ने के साथ-साथ लोगों की पूंजी भी बढ़ती (Planning Wedding Jewellery Shopping) जाती है. इसी वजह से लोग जेवरात के साथ-साथ निवेश के नजरिए से भी सोना और चांदी खरीद रहे हैं. लेकिन, 24 कैरेट या 22 कैरेट नहीं बल्कि लोग लाइटवेट ज्वेलरी खरीदने पर जोर दे रहे हैं. आजकल हल्के वजन के गहनों की मांग काफी है. ये देखने में आकर्षक तो लगते ही है, साथ ही ज्यादा महंगे नहीं होने के चलते जेब पर भी बोझ नहीं डालते. 

ऑप्शन के तौर पर प्रोडक्ट

जानकारी के अनुसार, जहां एक तरफ अधिक कैरैट वाली भारी गले की चैन 10 से 15 ग्राम में बनती है, वहीं लाइट वेट से वही चैन सिर्फ 3 ग्राम में रेडी हो जाती है. इसके अलावा अगर आप ज्वेलरी पर नजर डालें तो 1 ग्राम में इयररिंग, 7 ग्राम में नेकलेस, 8 ग्राम में हार और चूड़ी और 5 ग्राम में झुमका जैसे कई ऑप्शन मिल रहे हैं. जो चीज पहले 10 ग्राम में बनती थी, लोग उसे 5 ग्राम तक या अपने बजट के मुताबिक बनवा रहे हैं. 

24 कैरेट गोल्ड में ज्वैलरी क्यों नहीं बनती?

लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि 24 कैरेट गोल्ड सबसे अच्छा होता है. लेकिन, सच यह है कि 24 कैरेट गोल्ड सबसे शुद्ध होता है, जो बहुत सॉफ्ट होता है. इससे गहने बन ही नहीं सकते. गहनों के लिए हमेंशा 22 कैरेट या 18 कैरेट सोना यूज होता (Planning Wedding Jewellery Shopping) है. आज के इस वक्त में 18 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 114,623 प्रति 10 ग्राम पड़ती है.

डिमांड में 9 कैरेट गोल्ड 

सोने के बढ़ते दामों को देखते हुए सरकार ने अब 9 कैरेट गोल्ड को लीगल कर दिया गया है. यही नहीं, इसकी हॉलमार्किंग भी होने लगी है. यानी 9 कैरेट गोल्ड भी असली सोना है और यह कानूनी तौर पर मान्य है. इस गोल्ड की क्वालिटी की पहचान हॉलमार्क से की जाती है. विवाह के गहने डेली पहनने के लिए नहीं होते बल्कि इन्हें किसी खास मौकों, फंक्शन (Planning Wedding Jewellery Shopping) और पारिवारिक कार्यक्रमों में ही पहना जाता है. ऐसे में 9 कैरेट गोल्ड के गहने देखने में तकरीबन 22 कैरेट जैसे ही लगते हैं. इसके अलावा यह मजबूत भी ज्यादा होती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह बिना किसी कर्जे और आर्थिक प्रेशर के आसानी से खरीद सकते हैं. 

9 कैरेट सोने के लिए जरूरी है पहचान

9 कैरेट सोना हॉलमार्किंग यह पक्का करती है कि आप जो खरीद रहे हैं उसमें 37.5% सोना है. मतलब न ज्यादा और न कम. यह एक ऐसा सिस्टम है जो ग्राहकों को धोखाधड़ी, झूठे दावों और पीतल को सोना बताकर बेचने से बचाने के लिए बनाया गया है. अगर आपको चिंता है कि आपका गहना नकली हो सकता है, तो यह हॉलमार्क आपकी शंका दूर कर देता है. यह पारदर्शिता का सबसे बड़ा सबूत है, जो सोने की शुद्धता और मूल की पुष्टि करता है. जब 9 कैरेट सोने के गहनों के फायदों की बात हो तो यह वेरिफिकेशन मन की शांति देता है.

ऐसे करें BIS हॉलमार्किंग पहचान

बिना  BIS स्टैम्प चेक के सोना खरीदना ऐसी ही है, जैसे जुआ खेलना. वह एक छोटा सा निशान ही एकमात्र असली सबूत है कि आपका 9 कैरेट सोना सिर्फ़ कोई महंगी मिलावट नहीं है. यदि BIS हॉलमार्क नहीं है? तो इसे बेचना कानूनी तौर पर सही नहीं है. 

  • BIS लोगो – मंजूरी का आधिकारिक निशान.
  • शुद्धता का निशान के तौर पर 9 कैरेट सोने पर “375” देखें, जो 37.5% शुद्धता दिखाता है.
  • HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर) को चेक करें. यह ज्वेलर से जुड़ा एक यूनिक कोड है.
  • असेइंग सेंटर ID देखें, जहां आइटम का टेस्ट और सर्टिफाइड किया गया था.

शर्म कैसी, खुलकर पूछें सवाल

भारत में जून 2021 से ज्वैलर्स को हॉलमार्क के बिना सोना बेचना कानूनी तौर पर मना है. यह नियम हॉलमार्किंग ऑफ़ गोल्ड ज्वेलरी एंड आर्टिफैक्ट्स ऑर्डर, 2020 से आया है. आप कोई मोटी अंगूठी देख रहे हों या कोई नाजुक चेन ले रहे हों. अगर वह 9 कैरेट सोने की ज्वेलरी है, तो उस पर मुहर लगी होनी चाहिए और सर्टिफाइड होनी चाहिए. इसमें कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए.

अगर ऊपर दी गई पहचान में से कुछ भी गायब है तो आपको सवाल पूछना शुरू कर देना चाहिए. बिना स्टैंप वाला 9 कैरेट सोना बेचना गैर-कानूनी है. अगर आप बजट-फ्रेंडली ज्वेलरी खरीद रहे हैं जिसे आप बहुत ज़्यादा पहनेंगे, तो सिर्फ़ उनकी बातों पर भरोसा न करें. सर्टिफिकेट मांगें क्योंकि इसके लिए आप पैसे दे रहे हैं. दोबारा अच्छे से चेक करने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए तैयार किया गया है. सोने की कीमतें, मेकिंग चार्ज और टैक्स समय-समय पर और शहर के अनुसार बदल सकते हैं. आंकड़ों में बदलाव हो सकता है. इंडिया न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है. 9 कैरेट गोल्ड की उपलब्धता और हॉलमार्किंग ज्वेलर पर निर्भर करती है. खरीदने से पहले मौजूदा रेट, कैरेट, हॉलमार्क और शर्तों की पुष्टि जरूर करें.

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