Live
Search
Home > बिज़नेस > डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को RBI देगा 25,000 रुपये का मुआवजा, क्या हैं नियम और शर्तें?

डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को RBI देगा 25,000 रुपये का मुआवजा, क्या हैं नियम और शर्तें?

RBI Digital Fraud Compensation: RBI ने आम आदमी के हित में एक जरूरी प्रस्ताव पास किया है. इसमें कहा गया है कि छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार लोगों को मुआवज़ा मिलेगा.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 8, 2026 09:00:54 IST

Mobile Ads 1x1

RBI Digital Fraud Compensation: RBI ने आम आदमी के हित में एक जरूरी प्रस्ताव पास किया है. इसमें कहा गया है कि छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार लोगों को मुआवज़ा मिलेगा. मुआवज़ा नुकसान का 85% तक हो सकता है. इस रकम के लिए 25,000 रुपए की लिमिट तय की गई है.

यह मुआवज़ा हर व्यक्ति को सिर्फ़ एक बार दिया जाएगा. इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति एक से ज़्यादा बार फ्रॉड का शिकार होता है, तो उसे बार-बार मुआवज़ा नहीं मिलेगा.

RBI ने 6 मार्च को ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया

RBI का यह प्रस्ताव सेंट्रल बैंक द्वारा 6 मार्च को जारी किए गए ड्राफ्ट बदलावों का हिस्सा है. RBI डिजिटल ट्रांज़ैक्शन में कस्टमर लायबिलिटी से जुड़े फ्रेमवर्क का रिव्यू कर रहा है. सेंट्रल बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करते हुए यह घोषणा की. सेंट्रल बैंक का नया प्रस्ताव 1 जुलाई, 2026 को या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन पर लागू होगा. RBI ने इस ड्राफ्ट पर लोगों से कमेंट मांगे हैं. राय 6 अप्रैल, 2026 तक सबमिट की जा सकती है.

25,000 रुपए तक का मुआवजा

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में उन इंडिविजुअल कस्टमर्स के लिए मुआवज़े का प्रावधान है, जिन्हें कुछ मामलों में फ्रॉड वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन की वजह से 50,000 रुपए तक का नुकसान होता है. फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को नुकसान का 85% या 25,000 रुपए जो भी कम हो मिलेगा. ऐसा करने के लिए फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को फ्रॉड के पांच दिनों के अंदर तुरंत बैंक और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर फ्रॉड की रिपोर्ट करनी होगी.

अगर नुकसान की रकम 29,412 से कम है, जहां मुआवज़े की कैलकुलेशन 85% रेट पर की जाती है, तो RBI मुआवज़े का 65% कवर करेगा. बाकी 10% कस्टमर के बैंक और बेनिफिशियरी बैंक दोनों शेयर करेंगे. अगर कुल नुकसान 29,412 और 50,000 रुपए के बीच है, तो मुआवज़े की लिमिट 25,000 होगी. ऐसे मामलों में RBI 19,118 देगा. कस्टमर का बैंक और बेनिफिशियरी बैंक दोनों 2,941 रुपए देंगे.

फ्रॉड के 5 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज करनी होगी.

बैंक को एप्लीकेशन मिलने के 5 कैलेंडर दिनों के अंदर मुआवज़ा देना होगा. इसके बाद बैंक हर तिमाही RBI से रीइंबर्समेंट क्लेम कर सकेगा. फ्रॉड मुआवज़े के फ्रेमवर्क के अलावा RBI ने कस्टमर प्रोटेक्शन नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है. ये सभी प्रस्ताव डिजिटल बैंकिंग से जुड़े हैं. माना जा रहा है कि इससे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

MORE NEWS

Home > बिज़नेस > डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को RBI देगा 25,000 रुपये का मुआवजा, क्या हैं नियम और शर्तें?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 8, 2026 09:00:54 IST

Mobile Ads 1x1

RBI Digital Fraud Compensation: RBI ने आम आदमी के हित में एक जरूरी प्रस्ताव पास किया है. इसमें कहा गया है कि छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार लोगों को मुआवज़ा मिलेगा. मुआवज़ा नुकसान का 85% तक हो सकता है. इस रकम के लिए 25,000 रुपए की लिमिट तय की गई है.

यह मुआवज़ा हर व्यक्ति को सिर्फ़ एक बार दिया जाएगा. इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति एक से ज़्यादा बार फ्रॉड का शिकार होता है, तो उसे बार-बार मुआवज़ा नहीं मिलेगा.

RBI ने 6 मार्च को ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया

RBI का यह प्रस्ताव सेंट्रल बैंक द्वारा 6 मार्च को जारी किए गए ड्राफ्ट बदलावों का हिस्सा है. RBI डिजिटल ट्रांज़ैक्शन में कस्टमर लायबिलिटी से जुड़े फ्रेमवर्क का रिव्यू कर रहा है. सेंट्रल बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करते हुए यह घोषणा की. सेंट्रल बैंक का नया प्रस्ताव 1 जुलाई, 2026 को या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन पर लागू होगा. RBI ने इस ड्राफ्ट पर लोगों से कमेंट मांगे हैं. राय 6 अप्रैल, 2026 तक सबमिट की जा सकती है.

25,000 रुपए तक का मुआवजा

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में उन इंडिविजुअल कस्टमर्स के लिए मुआवज़े का प्रावधान है, जिन्हें कुछ मामलों में फ्रॉड वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन की वजह से 50,000 रुपए तक का नुकसान होता है. फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को नुकसान का 85% या 25,000 रुपए जो भी कम हो मिलेगा. ऐसा करने के लिए फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को फ्रॉड के पांच दिनों के अंदर तुरंत बैंक और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर फ्रॉड की रिपोर्ट करनी होगी.

अगर नुकसान की रकम 29,412 से कम है, जहां मुआवज़े की कैलकुलेशन 85% रेट पर की जाती है, तो RBI मुआवज़े का 65% कवर करेगा. बाकी 10% कस्टमर के बैंक और बेनिफिशियरी बैंक दोनों शेयर करेंगे. अगर कुल नुकसान 29,412 और 50,000 रुपए के बीच है, तो मुआवज़े की लिमिट 25,000 होगी. ऐसे मामलों में RBI 19,118 देगा. कस्टमर का बैंक और बेनिफिशियरी बैंक दोनों 2,941 रुपए देंगे.

फ्रॉड के 5 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज करनी होगी.

बैंक को एप्लीकेशन मिलने के 5 कैलेंडर दिनों के अंदर मुआवज़ा देना होगा. इसके बाद बैंक हर तिमाही RBI से रीइंबर्समेंट क्लेम कर सकेगा. फ्रॉड मुआवज़े के फ्रेमवर्क के अलावा RBI ने कस्टमर प्रोटेक्शन नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है. ये सभी प्रस्ताव डिजिटल बैंकिंग से जुड़े हैं. माना जा रहा है कि इससे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

MORE NEWS