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Budget 2026: टैक्स की छोटी गलती पर अब जेल नहीं! बजट 2026 में इनकम टैक्स कानूनों में बड़ा बदलाव

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में इनकम टैक्स कानूनों में बड़े सुधारों का एलान किया है. उन्होंने कहा कि अब छोटी-छोटी कर संबंधी गलतियों पर लोगों को अपराधी नहीं माना जाएगा और न ही सीधे जेल भेजा जाएगा.

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2026 में नौंवी बार बजट पेश कर रही हैं. 2026 केंद्रीय बजट में उन्होंने आम करदाताओं और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. वित्त मंत्री ने बोला कि अब छोटे-मोटे कर अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा और ऐसे मामलों में जेल की बजाय केवल जुर्माना लगाया जाएगा. पढ़िए पूरी खबर. 

अब नहीं होगी जेल

निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान बताया कि अगर किसी लेन-देन में नकद की जगह ऑनलाइन तरीके से पेमेंट हुआ है. तो अकाउंट्स की डिटेल्स या डॉक्यूमेंट न दिखा पाने को अब अपराध नहीं माना जाएगा. इसी तरह, TDS से जुड़ी कुछ गलतियों पर भी अब सीधे कार्रवाई या जेल नहीं होगी. इतना ही नहीं, बताया गया कि अब छोटे और मामूली मामलों में सिर्फ जुर्माना लगेगा, जेल नहीं होगी.

गंभीर मामलों के लिए होगा ये प्रावधान

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो मामले ज्यादा गंभीर होंगे, उनमें अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा तय की जाएगी, लेकिन ऐसे मामलों में भी अधिकतम दो साल की साधारण जेल का ही प्रावधान होगा. इसके साथ ही आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए समयसीमा में भी बदलाव किया गया है. अब करदाता नाममात्र शुल्क देकर अपने रिटर्न में 31 दिसंबर की जगह 31 मार्च तक संशोधन कर सकेंगे.

वित्त मंत्री ने क्या कहा?

निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘जहां पेमेंट कैश के बजाय किसी और चीज में किया जाता है, वहां अकाउंट्स की किताबें और डॉक्यूमेंट्स पेश न करने और TDS पेमेंट की जरूरत को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है. इसके अलावा, छोटे अपराधों पर सिर्फ जुर्माना लगेगा. बाकी मुकदमों को अपराध की गंभीरता के हिसाब से ग्रेड दिया जाएगा. उनमें ज्यादा से ज़्यादा दो साल की साधारण जेल होगी.’

सरकार का क्या है उद्देश्य?

सरकार इस कानून की वजह से चाहती है कि ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत मिले, छोटी गलतियों पर अपराध का टैग खत्म हो, कम केस, कम तनाव, आसान टैक्स सिस्टम लागू हो और लोग डर के बजाय स्वेच्छा से टैक्स भरें. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इससे कितनी राहत मिलती है. या इसका नुकसान होगा. 

Kamesh Dwivedi

पिछले चार वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत. जी न्यूज और अमर उजाला डिजिटल में सेवाएं दे चुके हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ मनोरंजन की खबरों में रुचि. क्रिकेट, राजनीति के अलावा कविताएं लिखने और पढ़ने का भी शौक है.

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