LPG Crisis: भारत में पिछले कुछ दिनों से एलपीजी गैस की तंगी देखने को मिल रही है. कुछ जगहों पर एलपीजी गैस की सप्लाई पूरी तरह से बाधित है तो कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर को बुक करने के लिए हेल्पलाइन नंबर काम नहीं कर रहे हैं. आज के समय में भारत का एलपीजी मार्केट 1 लाख करोड़ से ज्यादा का हो चुका है. इस सेक्टर को आगे बढ़ाने में एलपीजी गैस का महत्वपूर्ण योगदान देखने को मिला है.
आज भी भारत में कमर्शियल और घरेलू सिलेडंर की मांग और प्रोडक्शन लगातार बढ़ती हुई देखने को मिल रही है. लेकिन, आपके लिए यह जान लेना बेहद जरूरी है कि भारत में एलपीजी गैस गेम चेंजर की भूमिका कैसे निभाती है और इसकी शुरुआत कैसे हुई.
कैसे हुई एलपीजी गैस की शुरुआत?
कुछ लोग कहते हैं कि एलपीजी की शुरुआत 1050 के दौर में हुई थी तो वहीं कुछ बताते हैं कि इसे साल 1955 में शुरु किया गया था. वहीं, कुछ सोर्स बताते हैं कि एलपीजी गैस को साल 1956 में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) की स्थापना के बाद शुरु किया गया था. हालांकि, bharatpetroleum.in के मुताबिक भारत में एलपीजी गैस की शुरुआत 1955 में हुई थी. उस समय इसे बर्मा शेल के नाम से जाना जाता था, जोकि भारत पेट्रोलियम का ही एक हिस्सा बनी थी. जिसके बाद कंपनी द्वारा एलपीजी की शुरुआत देश में कर दी गई थी. हालांकि, अब लोग इसे एलपीजी गैस के नाम से ही जानते हैं.
एनर्जी मार्केट में कैसे बना गेमचेंजर?
भारत की अर्थव्यवस्था के साथ ही देश की एक लाख करोड़ की एनर्जी के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर एक गेमचेंजर की तरह काम करता है. दरअसल, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लॉन्च किए जाने के बाद से एलपीजी ने देश में स्थिति को बदल दिया. पहले भारत में हर घर में सिलेंडर की व्यवस्था नहीं थी. गांवों में तो एलपीजी गैस सिलेंडर के कनेक्शन के लिए लोग तमाम कोशिशें करते थे, लेकिन उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पाता था. जबकि इस योजना के आ जाने के बाद से देश के 99 प्रतिशत घरों में अब एलपीजी सिलेंडर पर खाना बनाया जा रहा है. देश के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के साथ ही एलपीजी ने बॉटलिंग प्लांट्स आदि बनवाने में मददगार रहा है, बल्कि देश में लाखों लोगों के लिए रोजगार का साधन भी बना है.