Health Insurance claim: बीमारियों पर होने वाला खर्च अक्सर भारी होता है, जो आपको कई साल पीछे कर देता है. भारत में लोगों की कमाई का कुछ हिस्सा तो केवल दवाओं और अस्पताल के चक्कर काटने में ही बीत जाता है. बीमारियों पर होने वाले खर्च से बचने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस या मेडिक्लेम पॉलिसी लेते हैं. लेकिन, कुछ मामलों में पॉलिसी लेने के बाद भी क्लेम मिलने में समस्या होती है या कई बार सारा प्रोसेस हो जाने के बाद भी व्यक्ति को क्लेम नहीं मिल पाता है.
देखा जाए तो इन पॉलिसीज का प्रीमियम हर साल कुछ प्रतिशत की दर से बढ़ता है, जबकि क्लेम के रेशियो में किसी भी तरह का सुधार नहीं होता है. यह बीमा कंपनियां कई बार लोगों के आर्थिक बोझ को कम करने के बजाय और बढ़ा देती हैं.
पिछले 3 सालों में बढ़ा 50 से 200 गुणा प्रीमियम
हाल ही में LocalCircles द्वारा किए गए एक सर्वे में देखा गया कि भारत में लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर काफी पैसा खर्च करते हैं बावजूद इसके बीमा कंपनियों द्वारा कुछ मामलों में क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है. यह सर्वे में कुल 323 जिलों में किया गया, जिसमें 54,000 लोगों को शामिल किया गया. जिसमें देखा गया कि 10 में से 4 पॉलिसीहोल्डर्स का क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है. वहीं, डेटा के मुताबिक देखा जाए तो पिछले 3 सालों में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम 50 से लेकर 200 फीसदी तक बढ़े हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम आसानी से कैसे पाएं?
हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम आसानी से पाने के लिए आपको सबसे पहले नेटवर्क हॉस्पिटल में जाना चाहिए. इसके अलावा एडमिट होने के समय ही अपनी कंपनी या एजेंट को एडमिशन की जानकारी दे दें और उनसे क्लेम अप्रूव करने के लिए कहें. इसके साथ ही डिस्चार्ज होने की डिटेल, हॉस्पिटल के बिल आदि को जमा करें. क्लेम नहीं मिलने पर आपको अपने क्लेम के प्रोसेस को ट्रैक करते रहना चाहिए. ऐसे में आपको अपनी बीमारी की सही जानकारी देनी चाहिए ताकि क्लेम समय से मिल जाए.