India Gold Jewellery Import Ban: सरकार ने बुधवार को तुरंत प्रभाव से सोने प्लैटिनम और चांदी की ज्वेलरी के इंपोर्ट पर रोक लगाने का ऐलान किया. इसका मकसद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) के गलत इस्तेमाल को रोकना है. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि ये रोक किसी भी पुराने कॉन्ट्रैक्ट, इर्रिवोकेबल लेटर ऑफ़ क्रेडिट, एडवांस पेमेंट, शिपमेंट स्टेटस या किसी दूसरे कमिटमेंट पर लागू होंगी. इसके मुताबिक ट्रांज़िशनल अरेंजमेंट का फायदा नहीं मिलेगा.
इसमें कहा गया “कस्टम्स टैरिफ हेडिंग CTH 7113 के तहत आने वाली चीज़ों की इंपोर्ट पॉलिसी को तुरंत प्रभाव से ‘फ्री’ से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ में बदला जाता है.” सोने, चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी के आर्टिकल इस हेडिंग के तहत आते हैं. इन चीज़ों के इंपोर्टर्स को अब DGFT से परमिशन या लाइसेंस की ज़रूरत होगी. इसके साथ ही अब सोन, चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी के सभी इंपोर्ट पर रोक लग गई है.
किस पर नहीं लगेगा ये रोक?
इस फैसले के बाद, सभी सोने, चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी के इंपोर्ट पर रोक लगा दी गई है. हालांकि, यह रोक 100% एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZs) में मौजूद कंपनियों पर लागू नहीं होगी. इसके अलावा, फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट स्कीम के तहत आने वाले इंपोर्ट को भी छूट दी गई है. एक इंडस्ट्री अधिकारी ने कहा कि कुछ इंपोर्टर इंडिया-ASEAN FTA का गलत फायदा उठा रहे थे. उन्होंने सरकार से लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान बनाने की अपील की ताकि असली ट्रेडर्स को नुकसान न हो.
FTA के गलत इस्तेमाल और लाइसेंसिंग में आसानी को लेकर इंडस्ट्री की चिंताएं
एक इंडस्ट्री अधिकारी ने कहा कि कुछ इंपोर्टर्स इंडिया-आसियान FTA का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. अधिकारी ने सरकार से लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान बनाने की अपील की ताकि असली प्लेयर्स को इस कदम से नुकसान न हो.भारत का 2010 से ASEAN, जो 10 साउथ-ईस्ट एशियाई देशों का ग्रुप है, के साथ गुड्स ट्रेड के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है. पिछले साल नवंबर में, सरकार ने कुछ खास तरह की प्लैटिनम ज्वेलरी के इंपोर्ट पर अप्रैल तक रोक लगा दी थी. इसी तरह की रोक सितंबर 2025 में चांदी की ज्वेलरी पर भी लगाई गई थी, जो इस साल मार्च तक लागू रही. अधिकारी के मुताबिक, कुछ ट्रेडर्स टैक्स में अंतर का फायदा उठाकर और ड्यूटी से बचकर FTA के जरिए जल्दी मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे थे. इस कदम का मकसद थाईलैंड जैसे देशों से बिना पत्थर वाली ज्वेलरी के रूप में कीमती धातुओं के इम्पोर्ट को रोकना है.