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EU के साथ पीएम मोदी की बड़ी चालाकी; भारत की सबसे खास चीज को रखा FTA से बाहर ; जानें इसे क्यों कहा जा रहा मदर ऑफ आल डील?

India-EU Trade Deal: EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है और भारत एक बड़ी इकॉनमी है. अगर दोनों एक साथ आते हैं तो 2 अरब लोगों का मार्केट बनेगा और यह डील दुनिया की GDP का 25% कवर करेगी.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 27, 2026 15:25:23 IST

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India-EU Trade Deal: भारत और यूरोप के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील साइन हुई है. लगभग दो दशकों की रुक-रुक कर बातचीत के बाद, यह एग्रीमेंट भारत को EU के साथ फ्री ट्रेड के लिए धीरे-धीरे अपने बड़े और कड़े रेगुलेटेड मार्केट को खोलने की इजाज़त देगा. यह ट्रेड डील EU के लगभग 90 प्रतिशत प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म कर देती है या कम कर देती है.पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि भारत और EU के बीच FTA पर सहमति बन गई है. उन्होंने कहा कि लोग इसे मदर ऑफ आल डील कह रहे हैं.

जानिए क्यों कहा जा रहा मदर ऑफ आल डील?

  • EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है और भारत एक बड़ी इकॉनमी है. अगर दोनों एक साथ आते हैं तो 2 अरब लोगों का मार्केट बनेगा और यह डील दुनिया की GDP का 25% कवर करेगी.
  • दुनिया US और चीन के विकल्प ढूंढ रही है. ऐसे में, यह डील भारत को चीन की जगह एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है और यूरोप के साथ ट्रेड तेजी से बढ़ेगा.
  • पिछले साल, भारत-EU ट्रेड ₹12.5 लाख करोड़ था. FTA के बाद, दोनों देशों की एक-दूसरे के मार्केट तक ज़्यादा पहुंच होगी और ट्रेड के दोगुना होने की उम्मीद है.

डेयरी सेक्टर FTA से बाहर

इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से एग्रीकल्चर और डेयरी जैसे सेक्टर को बाहर रखा गया है. भारत को डर है कि यूरोपियन एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स उसके किसानों की इनकम पर असर डाल सकते हैं. EU भी अपने किसानों को लेकर सावधान है, इसलिए इन मुद्दों को एग्रीमेंट में शामिल नहीं किया गया है.

ट्रेड के अलावा भारत और यूरोपियन यूनियन इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट, GI टैग और डिफेंस और सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर भी बातचीत कर रहे हैं. लेबर मूवमेंट, डिफेंस इंडस्ट्री में पार्टनरशिप और बढ़े हुए स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन पर भी एग्रीमेंट होने की उम्मीद है.

यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि एक सफल भारत दुनिया को ज़्यादा स्टेबल, सिक्योर और खुशहाल बनाता है. उन्होंने इस एग्रीमेंट को हिस्टोरिक बताया और कहा कि इससे लगभग दो बिलियन लोगों का एक कॉमन मार्केट बनेगा, जो दुनिया की टोटल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.

19 साल से रुकी हुई थी इंडिया-EU ट्रेड डील 

इंडिया और EU के बीच ट्रेड डील पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी लेकिन 2013 में रुक गई. इसका कारण यह था कि दोनों पक्ष कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाए. EU चाहता था कि इंडिया एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर को खोले लेकिन इंडिया को डर था कि इससे किसानों को नुकसान होगा. इंडिया ने शराब और कारों पर टैक्स कम करने की मांग भी मानने से मना कर दिया.

भारत दुनिया भर के सभी देशों के लिए उम्मीद की किरण

ट्रंप ने जो हालात बनाए हैं उसे देखते हुए भारत दुनिया भर के कई देशों के लिए उम्मीद की किरण है. सिर्फ़ टैरिफ ही नहीं बल्कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के विचार ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है. ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपियन देश ट्रंप के खिलाफ हैं.

ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स EU को कर रही है दूर

 ट्रंप के कार्यकाल में EU और US के बीच रिश्तों में तनाव देखा गया है. ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स EU को US से दूर कर रही है. ट्रंप टैरिफ की धमकी देकर EU को अपनी शर्तों पर ट्रेड करने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं. US प्रेसिडेंट द्वारा बनाए गए मौजूदा हालात ने यूरोपियन देशों को एक स्टेबल और भरोसेमंद पार्टनर की उम्मीद के साथ भारत की ओर देखने पर मजबूर किया है.

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