Live TV
Search
Home > बिज़नेस > बैंक खाते में एक या दो कितने नॉमिनी बेहतर, भविष्य पर क्या पड़ेगा असर, जानें पूरी जानकारी

बैंक खाते में एक या दो कितने नॉमिनी बेहतर, भविष्य पर क्या पड़ेगा असर, जानें पूरी जानकारी

कई बार लोग बैंक अकाउंट या उससे जुड़ी जगहों पर केवल एक नॉमिनी का नाम लिखते हैं. हालांकि आरबीआई का कहना है कि एक से ज्यादा नॉमिनी लिखना फायदेमंद होता हैं. वहीं सिंगल और जॉइंट नॉमिनेशन के अपने-अपने फायदे और नुकसान होते हैं.

Written By: Deepika Pandey
Last Updated: April 6, 2026 18:14:37 IST

Mobile Ads 1x1

Joint Nomination vs Single Nomination: बहुत से लोग जब बैंक अकाउंट या बैंक से किसी अन्य तरह का काम कराते हैं, तो उनमें नॉमिनी भरने का ऑप्शन आता है, जिसमें लोग अक्सर अपने पैरेंट्स या अपनी वाइफ को नॉमिनी चुनते हैं. हालांकि अधिकतर लोग केवल एक नॉमिनी ही चुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नॉमिनी कितने चुनने चाहिए. जी हां, आपको एक नहीं बल्कि दो नॉमिनी चुनने चाहिए. आरबीआई के दिशानिर्देशानुसार, जॉइंट नॉमिनेशन यानी एक से ज्यादा नॉमिनेशन होना बेहतर होता है क्योंकि यह बेहतर नियंत्रण, संपत्ति का तेजी से हस्तांतरण और पारिवारिक विवादों को कम करता है.

क्या होता है नॉमिनी?

नॉमिनी  वो व्यक्ति होता है, जो खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक में जमा राशि ले सकता है लेकिन वो मालिक नहीं होता. वो केवल रकम पाने वाला अधिकृत व्यक्ति होता है. हालांकि  उसका असली हकदार कानूनी वारिस होते हैं. 

एक नॉमिनी रखने के फायदे

एक नॉमिनी रखने से जमा राशि को क्लेम करना आसान हो जाता है. साथ ही कागजी काम भी कम होते हैं और पैसे निकालने में ज्यादा लड़ाई-झगड़े और बहस की उलझन कम रहती है. एक नॉमिनी अधिकतर जीवनसाथी को बनाना चाहिए या ऐसे इंसान को जिस पर भरोसा हो. हालांकि ध्यान रखने वाली बात ये है कि अगर नॉमिनी की मृत्यु पहले हो जाती है और उसे बैंक खाते में अपडेट करके नॉमिनी का नाम न बदला जाए, तो पैसे निकालने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है.

संयुक्त नॉमिनी रखने के फायदे और नुकसान

संयुक्त नॉमिनी रखने से  परिवार के अलग-अलग सदस्यों में पहले से तय हिस्सों में आसानी से बंटवारा हो जाता है. अगर प्रतिशत साफ तौर पर लिखा गया हो, तो भविष्य में विवाद कम हो सकते हैं. हालांकि अगर प्रतिशत तय नहीं किया गया, तो भविष्य में झगड़े बढ़ सकते हैं. साथ ही ये भी साफ रखना चाहिए कि अगर एक नॉमिनी नहीं है, तो उसकी जगह पर कौन हिस्सा लेगा.

MORE NEWS

Home > बिज़नेस > बैंक खाते में एक या दो कितने नॉमिनी बेहतर, भविष्य पर क्या पड़ेगा असर, जानें पूरी जानकारी

Written By: Deepika Pandey
Last Updated: April 6, 2026 18:14:37 IST

Mobile Ads 1x1

Joint Nomination vs Single Nomination: बहुत से लोग जब बैंक अकाउंट या बैंक से किसी अन्य तरह का काम कराते हैं, तो उनमें नॉमिनी भरने का ऑप्शन आता है, जिसमें लोग अक्सर अपने पैरेंट्स या अपनी वाइफ को नॉमिनी चुनते हैं. हालांकि अधिकतर लोग केवल एक नॉमिनी ही चुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नॉमिनी कितने चुनने चाहिए. जी हां, आपको एक नहीं बल्कि दो नॉमिनी चुनने चाहिए. आरबीआई के दिशानिर्देशानुसार, जॉइंट नॉमिनेशन यानी एक से ज्यादा नॉमिनेशन होना बेहतर होता है क्योंकि यह बेहतर नियंत्रण, संपत्ति का तेजी से हस्तांतरण और पारिवारिक विवादों को कम करता है.

क्या होता है नॉमिनी?

नॉमिनी  वो व्यक्ति होता है, जो खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक में जमा राशि ले सकता है लेकिन वो मालिक नहीं होता. वो केवल रकम पाने वाला अधिकृत व्यक्ति होता है. हालांकि  उसका असली हकदार कानूनी वारिस होते हैं. 

एक नॉमिनी रखने के फायदे

एक नॉमिनी रखने से जमा राशि को क्लेम करना आसान हो जाता है. साथ ही कागजी काम भी कम होते हैं और पैसे निकालने में ज्यादा लड़ाई-झगड़े और बहस की उलझन कम रहती है. एक नॉमिनी अधिकतर जीवनसाथी को बनाना चाहिए या ऐसे इंसान को जिस पर भरोसा हो. हालांकि ध्यान रखने वाली बात ये है कि अगर नॉमिनी की मृत्यु पहले हो जाती है और उसे बैंक खाते में अपडेट करके नॉमिनी का नाम न बदला जाए, तो पैसे निकालने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है.

संयुक्त नॉमिनी रखने के फायदे और नुकसान

संयुक्त नॉमिनी रखने से  परिवार के अलग-अलग सदस्यों में पहले से तय हिस्सों में आसानी से बंटवारा हो जाता है. अगर प्रतिशत साफ तौर पर लिखा गया हो, तो भविष्य में विवाद कम हो सकते हैं. हालांकि अगर प्रतिशत तय नहीं किया गया, तो भविष्य में झगड़े बढ़ सकते हैं. साथ ही ये भी साफ रखना चाहिए कि अगर एक नॉमिनी नहीं है, तो उसकी जगह पर कौन हिस्सा लेगा.

MORE NEWS