New Gratuity Rule: नए लेबर कोड को लेकर कर्मचारियों के बीच इन दिनों ग्रेच्युटी पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अब सिर्फ एक साल नौकरी करने पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है. इस खबर ने खासतौर पर युवाओं और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को उम्मीद दे दी है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नियम हर कर्मचारी पर लागू होता है या फिर इसके पीछे कुछ शर्तें भी हैं.
ग्रेच्युटी का नया नियम क्या है?
New Gratuity Rule: नए लेबर कोड (Code on Social Security, 2020) के लागू होने के बाद ग्रेच्युटी को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है. अब फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की लगातार सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी मिलने का हक होगा, जबकि पहले इसके लिए 5 साल जरूरी थे.हालांकि, परमानेंट कर्मचारियों के लिए नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्हें पहले की तरह 5 साल की निरंतर सेवा पूरी करनी होगी.
ग्रेच्युटी एक तरह का कानूनी लाभ है, जो कंपनी अपने कर्मचारियों को उनकी लंबी सेवा के सम्मान में देती है. यह रकम Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत दी जाती है. आमतौर पर यह पैसा नौकरी छोड़ने, रिटायरमेंट या किसी खास परिस्थिति में कर्मचारी या उसके परिवार को मिलता है. इसे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है.
अब तक ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम पांच साल की लगातार नौकरी जरूरी होती थी. अगर कोई कर्मचारी पांच साल पूरे होने से पहले नौकरी छोड़ देता था, तो वह ग्रेच्युटी का हकदार नहीं माना जाता था. इसी वजह से ग्रेच्युटी को लंबी नौकरी से जोड़कर देखा जाता था.
Code on Social Security, 2020 के तहत सरकार ने कुछ कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक अब Fixed-Term Employees और Contract Workers को सिर्फ एक साल की लगातार सेवा पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है. यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए किया गया है, जो तय समय के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और पहले पांच साल पूरे न कर पाने की वजह से इस लाभ से वंचित रह जाते थे.
यहीं सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन है. नए नियम परमानेंट कर्मचारियों पर लागू नहीं होते. परमानेंट कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने की शर्त अब भी वही पुरानी है, यानी पांच साल की लगातार नौकरी. लेबर कोड में उनके लिए इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है.कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक एक साल वाली ग्रेच्युटी सुविधा सिर्फ फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए लाई गई है. परमानेंट कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.
परमानेंट कर्मचारियों के लिए भी कुछ खास परिस्थितियों में पांच साल की शर्त लागू नहीं होती. अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो उसकी नौकरी की अवधि चाहे जितनी भी रही हो, ग्रेच्युटी देनी होती है. इसके अलावा सामान्य स्थिति में पांच साल पूरे करना जरूरी है.
ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी की आखिरी सैलरी के आधार पर की जाती है. इसमें बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस शामिल होते हैं. यह रकम नौकरी खत्म होने के बाद एकमुश्त दी जाती है, जिससे कर्मचारी को आगे की जिंदगी में आर्थिक सहारा मिल सके.
हां, ग्रेच्युटी को कंपनी के CTC यानी Cost to Company का हिस्सा माना जाता है. यह कंपनी की भविष्य की जिम्मेदारी होती है, जिसे वह पहले से अपने खर्च में जोड़कर चलती है, भले ही कर्मचारी को यह पैसा बाद में मिले.
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