Mukesh Ambani: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि उनका ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लागत को उसी तरह कम करेगा जैसे उसने मोबाइल डेटा की लागत कम की थी. उन्होंने कहा कि रिलायंस ग्रुप की कंपनियां जियो और RIL मिलकर अगले सात सालों में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेंगी. उन्होंने यह बयान AI इम्पैक्ट समिट में दिया.
अंबानी ने कहा कि AI का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है, और इसके आने से नौकरियां नहीं जाएंगी. उन्होंने कहा कि दुनिया इस बात पर बहस कर रही है कि क्या AI कुछ लोगों के हाथों में पावर जमा कर देगा या सभी के लिए मौके बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि AI का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है. AI “सुपर अबंडेंस” के दौर की शुरुआत कर सकता है.
नई नौकरियां बनेंगी
गुरुवार को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में मुकेश अंबानी ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरियों का माहौल बदल देगा. इससे बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने के बजाय नई, खास भूमिकाएं बनेंगी. उन्होंने कहा, “हम यह साबित करेंगे कि AI नौकरियां नहीं छीनेगा. बल्कि, यह नए, हाई-स्किल्ड काम के मौके बनाएगा.” उन्होंने कहा कि भारत में स्किल्ड प्रोफेशनल्स का एक बड़ा पूल है और इसका बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देश को इनक्लूसिव ग्रोथ और लगातार आर्थिक तरक्की के लिए AI का फायदा उठाने की मजबूत स्थिति में रखता है.
कंपनी का प्लान क्या है?
अंबानी ने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और जियो भारतीय बिजनेस, कंपनियों, IITs और रिसर्च इंजीनियरों के साथ मिलकर AI डेवलपमेंट को तेज करेंगे.
उन्होंने कहा कि कंपनी की स्ट्रैटेजी ऐसे AI सॉल्यूशन देने पर फोकस करेगी जो स्केलेबल, भरोसेमंद और कॉस्ट-इफेक्टिव हों.
उन्होंने हार्ड पावर की ज़्यादा कीमत और इंफ्रास्ट्रक्चर की कम उपलब्धता को AI के विस्तार में रुकावट डालने वाली मुख्य चुनौतियों के तौर पर बताया.
इन कोशिशों को डेवलप करने के लिए, उन्होंने कहा कि जियो इंटेलिजेंस भारत के लिए एक सॉवरेन हार्ड फ्रेमवर्क बनाएगा, जिसमें तीन मुख्य कोशिशें शामिल होंगी, जिसकी शुरुआत गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर बनाने से होगी.
जामनगर में काम शुरू हो गया है
अंबानी ने बताया कि जामनगर में डेटा सेंटर का कंस्ट्रक्शन शुरू हो गया है. लक्ष्य 2026 के आखिर तक 120 मेगावाट कैपेसिटी चालू करना है, जिसे गीगावाट लेवल तक और बढ़ाया जाएगा. पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा. अंबानी ने AI को आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया.