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FAQ-Senior Citizen Savings Scheme: कितना मिलता है SCSS स्कीम में ब्याज, क्या हैं बेनिफिट्स और क्या पति-पत्नी खोल सकते हैं ज्वाइंट अकाउंट; यहां जानें हर सवाल के जवाब

Senior Citizen Savings Scheme :  60 साल और इससे अधिक उम्र के लोग SCSS मेंनिवेश शुरू कर सकते हैं. यह रिटायरमेंट के बाद की एक फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट है. इस स्कीम का सबसे बड़ा आकर्षण है- ब्याज दर.

Written By: JP YADAV
Last Updated: January 4, 2026 19:25:40 IST

Senior Citizen Savings Scheme: समाज में आ रहे बदलाव के बीच सीनियर सिटीजन के मन में बुढ़ापे की चिंता वाजिब है. शहरी जीवन भले ही सुख-सुविधाओं से भरपूर हो, लेकिन इसके लिए ठीकठीक कीमत भी अदा करनी पड़ती है. उम्र बढ़ने के साथ कमाई घटती है, लेकिन बीमारियां बढ़ जाती है. सरकारी नौकरी से रिटायर्ड हैं तो कुछ राहत भी है, लेकिन प्राइवेट जॉब से बाहर होते ही भविष्य की चिंता होने लगती है. पिछले दिनों वित्त मंत्रालय ने छोटी बचत योजनाओं की नई ब्याज दरों का एलान किया है. इसके तहत पीपीएफ और सीनियर सिटीजन स्कीम (SCSS) की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) 2026 में ब्याज दर, टैक्स फायदे और निवेश की लिमिट से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं. इस स्टोरी में हम देंगे इससे जुड़ी हर जानकारी. 

कितनी है SCSS की ब्याज दर?

वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स के ब्याज दरों की समीक्षा करने के दौरान इसके बाद ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. पिछली तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर के दौरान SCSS की ब्याज दर 8.2 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई थी. कोई बदलाव नहीं होने से इन स्मॉल सेविंग स्कीम्स में सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) भी शामिल है. ऐसे में SCSS की ब्याज दर 8.2 रहेगी. सरकार हर तिमाही  SCSS की ब्याज दर में संशोधन करती है. 

क्या है SCSS?

सीनियर सिटीजन के हितों और भविष्य की सुरक्षा के लिए बनाई गई  एक सरकारी रिटायरमेंट बेनिफिट स्कीम है. केंद्र सरकार प्रत्येक तिमाही में इसमें शामिल स्कीम्स के लिए ब्याज दरों में संशोधन करती है. आसान भाषा में समझें तो सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम ( SCSS) पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम का एक हिस्सा है. यह स्कीम्स रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम की ज़रूरत वाले सीनियर सिटीजन को फाइनेंशियल सिक्युरिटी देने के लिए है. इसमें 60 साल से ज़्यादा उम्र के लोग अकेले या मिलकर SCSS अकाउंट खोल सकते हैं. इसमें ब्याज दरों तुलनात्मक रूप से अधिक होती हैं. 

SCSS के लिए क्या है होती है शर्त?

केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए नियमों के मुताबिक, SCSS में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सीनियर सिटिजन निवेश शुरू कर सकते हैं. इस योजना में फिलहाल 8.2% ब्याज मिल रहा है. यह ज्यादातर बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों से अधिक है. 

कब से नहीं हुआ ब्याज दरों में बदलाव?

विशेषज्ञों के मुताबिक, 1 अप्रैल, 2023 से अब तक SCSS की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह रिटायरमेंट के बाद की एक फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट है, जिसमें 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र का शख्स निवेश कर सकता है. 

क्या है SCSS में निवेश की लिमिट?

नियमों के मुताबिक, SCSS स्कीम्स में प्रत्येक वर्ष 1000 रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है. इसमें ब्याज दर अधिक होती है, इसलिए यह आकर्षक है. 

क्या है लॉकिन पीरियड?

यहां पर ध्यान देना जरूरी है कि इंवेस्टर्स का पैसा 5 साल तक लॉक (lock-in period) रहता है. साल आगे बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन कम नहीं किए जा सकते हैं. 

टैक्स में कितनी मिलती है छूट?

SCSS स्कीम्स के तहत फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट में इंवेस्टर्स को 80C के तहत 1.50 लाख रुपये तक टैक्स छूट दी जाती है. इसके बाद मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल है. इसमें राहत की बात यह है कि स्कीम्स की मैच्योरिटी पर आपका मूलधन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. इसका मतलब प्रॉफिट पर टैक्स देने के लिए तैयार रहें. 

साल में कितनी बार मिलता है ब्याज?

SCSS स्कीम्स की खूबी यही है कि ब्याज हर तीन महीने यानी तिमाही मिलता है. मार्च, जून, सितंबर या दिसंबर के अंत तक सरकार द्वारा ब्याज का एलान किया जाता है. इन स्कीम्स में प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर और 1 जनवरी को ब्याज  स्कीम्स में दी जाती है. 

30 लाख जमा करने पर कितना होगा फायदा?

SCSS स्कीम बुजुर्गों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. मान लीजिये आपने 30 लाख रुपये इंवेस्ट किया है यानी जमा किया है. 8.2   प्रतिशत की ब्याज दर के हिसाब से इंवेस्टर्स को प्रत्येक 3 महीने बाद 61,500 रुपये ब्याज के रूप में मिलेंगे. 30 लाख रुपये इंवेस्ट करने पर प्रत्येक 5 साल में 12 लाख 30,000 रुपये का ब्याज मिलेगी. इस तरह मैच्योरिटी अमाउंट 42,30,000 रुपये हो जाएगा. यह 30 लाख रुपये की बचत के हिसाब से है. 

कैसे तय होती है SCSS की ब्याज?

सच बात तो यह है कि सरकार सीधे SCSS समेत सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर तय नहीं करती है. ब्याज दरों का आधार 2010 में बनी श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिशें है. तय नियम के अनुसार, SCSS की ब्याज दर 5 साल की सरकारी बॉन्ड की यील्ड से जुड़ी होती है. इसमें 0.25 प्रतिशित अतिरिक्त जोड़ा जाता है. वैसे सरकार पूरी तरह श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं, लेकिन ऐसा कम ही होता है.  

क्या पति-पत्नी खोल सकते हैं ज्वाइंट अकाउंट

इस योजना में इंवेस्ट करना बहुत ही आसान है. श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, न्यूनतम 1000 रुपये से स्कीम्स में निवेश शुरू किया जा सकता है. कोई भी सीनियर सिटीजन अकेले खाता खोल सकता है. इसमें पति पत्नी मिलकर संयुक्त खाता खोल सकते हैं. खाता 5 वर्ष के लिए ही खोला जाता है और जरूरत पड़ने पर इसे तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है.

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