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Silver Demand Rising Prices: इंडस्ट्रियल डिमांड चलते कैसे नई ऊंचाइयों को छू रही चांदी?

Silver Demand Rising Prices: चांदी की कीमतों ने सभी को चौंका दिया है. किसी ने नहीं सोचा था कि चांदी की इस तरह चांदी हो जाएगी. जानें आखिर क्यों चांदी के भाव इतने बढ़ रहे हैं?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 6, 2026 12:32:10 IST

Silver Demand Rising Prices: चांदी की कीमतों ने सभी को चौंका दिया है. किसी ने नहीं सोचा था कि चांदी की इस तरह चांदी हो जाएगी. जिसे कभी सेकेंडरी या कम कीमती धातु माना जाता था, हाल ही में एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन गई है. औद्योगिक मांग की वजह से इसकी कीमतें ऊंचाइयों पर पहुंच गईं. मिडिल क्लास और इससे नीचे के लोगों के लिए चांदी ही एक मात्र ऐसी धातु थी, जिसे लोग शादी, त्योहार के मौकों पर खरीददारी के तौर पर लेता था. चांदी की बढ़ती मांग से पता चलता है कि अब यह सिर्फ एक मौद्रिक संपत्ति नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और एनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कमोडिटी है.

औद्योगिक क्षेत्र से बड़े भाव

यह ट्रेंड बताता है कि चांदी की कीमत न केवल सोने के साथ इसके पारंपरिक जुड़ाव से, बल्कि इसके औद्योगिक उपयोगों से भी प्रभावित होगी. इससे भविष्य में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. आज चांदी की अपील एक कीमती धातु और एक औद्योगिक ज़रूरत के रूप में इसकी दोहरी भूमिका में है. सोलर और फोटोवोल्टिक्स की बात करें तो सोलर इंडस्ट्री चांदी की सबसे बड़ी उपभोक्ता है. साल 2024 में चांदी धातु की खपत में 19 प्रतिशत और सिल्वर पेस्ट में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके अलावा चांदी की बेहतरीन कंडक्टिविटी इसे प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कनेक्टर और सेंसर के लिए आदर्श बनाती है. जैसे-जैसे 5G, AI और IoT का इस्तेमाल बढ़ेगा, टेक्नोलॉजी में चांदी की मांग भी बढ़ेगी. 

यहां भी है मांग

चांदी का इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक जटिल वायरिंग, सेंसर और स्टेबिलिटी सिस्टम की जरूरतों को पूरा करने में भी यूज होता है. इनमें से कई में चांदी का उपयोग होता है. बैटरी और EV इलेक्ट्रॉनिक्स में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है. इसके अलावा त्योहारों के दौरान और भारत जैसे बाजारों में ज्वेलरी और उपहारों की मांग अभी भी चांदी की खपत का एक अहम हिस्सा है. चांदी का उपयोग एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग्स, घाव की ड्रेसिंग और चिकित्सा उपकरणों में इसके कीटाणुनाशक गुणों के कारण किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा में इसकी मांग बढ़ रही है.

हर क्षेत्र में हो रहा उपयोग

चांदी की हालिया रैली असाधारण रही है. साल 2025 में यह रिकॉर्ड प्रति औंस 53 अमेरिकी डॉलर से अधिक पर पहुंच गई. इस साल अब तक 85% की वृद्धि हुई, जो सोने से कहीं अधिक है. चांदी का छोटा बाजार आकार और भारी औद्योगिक उपयोग इसे सोने की तुलना में अधिक अस्थिर और मांग में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाता है. आज की कीमत में वृद्धि सिर्फ अटकलों से नहीं, बल्कि फंडामेंटल कारणों से हो रही है. 

बैंक और सॉवरेन खरीद

एक दिलचस्प बात यह है कि सेंट्रल बैंक और सॉवरेन संस्थाएं अब चांदी को एक रिजर्व या रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अपने रिजर्व खरीद कार्यक्रम में चांदी के लिए महत्वपूर्ण फंड आवंटित किए हैं. सऊदी अरब के सेंट्रल बैंक ने सिल्वर मार्केट में एंट्री की है और SLV जैसे सिल्वर ETF में शेयर खरीदे हैं. एनालिस्ट्स का कहना है कि सेंट्रल बैंक लंबे समय से सोना खरीदते रहे हैं लेकिन सिल्वर की तरफ यह बदलाव इसे रिटेल मार्केट से परे एक इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर पहचान दिला सकता है.

इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर सिल्वर

रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स भी डिमांड बढ़ा रहे हैं. सिल्वर ETF और फंड्स में रिकॉर्ड इन्वेस्टमेंट हो रहा है. भारत में निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF ने हाल ही में AUM में 10,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है, जो इस फॉर्मेट में बढ़ते भरोसे को दिखाता है. सप्लाई की कमी और बढ़ते प्रीमियम के कारण कुछ फंड्स ने नए इन्वेस्टमेंट रोक दिए हैं. इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर सिल्वर का भविष्य काफी अच्छा दिख रहा है.

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Silver Demand Rising Prices: इंडस्ट्रियल डिमांड चलते कैसे नई ऊंचाइयों को छू रही चांदी?

Silver Demand Rising Prices: चांदी की कीमतों ने सभी को चौंका दिया है. किसी ने नहीं सोचा था कि चांदी की इस तरह चांदी हो जाएगी. जानें आखिर क्यों चांदी के भाव इतने बढ़ रहे हैं?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 6, 2026 12:32:10 IST

Silver Demand Rising Prices: चांदी की कीमतों ने सभी को चौंका दिया है. किसी ने नहीं सोचा था कि चांदी की इस तरह चांदी हो जाएगी. जिसे कभी सेकेंडरी या कम कीमती धातु माना जाता था, हाल ही में एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन गई है. औद्योगिक मांग की वजह से इसकी कीमतें ऊंचाइयों पर पहुंच गईं. मिडिल क्लास और इससे नीचे के लोगों के लिए चांदी ही एक मात्र ऐसी धातु थी, जिसे लोग शादी, त्योहार के मौकों पर खरीददारी के तौर पर लेता था. चांदी की बढ़ती मांग से पता चलता है कि अब यह सिर्फ एक मौद्रिक संपत्ति नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और एनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कमोडिटी है.

औद्योगिक क्षेत्र से बड़े भाव

यह ट्रेंड बताता है कि चांदी की कीमत न केवल सोने के साथ इसके पारंपरिक जुड़ाव से, बल्कि इसके औद्योगिक उपयोगों से भी प्रभावित होगी. इससे भविष्य में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. आज चांदी की अपील एक कीमती धातु और एक औद्योगिक ज़रूरत के रूप में इसकी दोहरी भूमिका में है. सोलर और फोटोवोल्टिक्स की बात करें तो सोलर इंडस्ट्री चांदी की सबसे बड़ी उपभोक्ता है. साल 2024 में चांदी धातु की खपत में 19 प्रतिशत और सिल्वर पेस्ट में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके अलावा चांदी की बेहतरीन कंडक्टिविटी इसे प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कनेक्टर और सेंसर के लिए आदर्श बनाती है. जैसे-जैसे 5G, AI और IoT का इस्तेमाल बढ़ेगा, टेक्नोलॉजी में चांदी की मांग भी बढ़ेगी. 

यहां भी है मांग

चांदी का इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक जटिल वायरिंग, सेंसर और स्टेबिलिटी सिस्टम की जरूरतों को पूरा करने में भी यूज होता है. इनमें से कई में चांदी का उपयोग होता है. बैटरी और EV इलेक्ट्रॉनिक्स में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है. इसके अलावा त्योहारों के दौरान और भारत जैसे बाजारों में ज्वेलरी और उपहारों की मांग अभी भी चांदी की खपत का एक अहम हिस्सा है. चांदी का उपयोग एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग्स, घाव की ड्रेसिंग और चिकित्सा उपकरणों में इसके कीटाणुनाशक गुणों के कारण किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा में इसकी मांग बढ़ रही है.

हर क्षेत्र में हो रहा उपयोग

चांदी की हालिया रैली असाधारण रही है. साल 2025 में यह रिकॉर्ड प्रति औंस 53 अमेरिकी डॉलर से अधिक पर पहुंच गई. इस साल अब तक 85% की वृद्धि हुई, जो सोने से कहीं अधिक है. चांदी का छोटा बाजार आकार और भारी औद्योगिक उपयोग इसे सोने की तुलना में अधिक अस्थिर और मांग में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाता है. आज की कीमत में वृद्धि सिर्फ अटकलों से नहीं, बल्कि फंडामेंटल कारणों से हो रही है. 

बैंक और सॉवरेन खरीद

एक दिलचस्प बात यह है कि सेंट्रल बैंक और सॉवरेन संस्थाएं अब चांदी को एक रिजर्व या रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अपने रिजर्व खरीद कार्यक्रम में चांदी के लिए महत्वपूर्ण फंड आवंटित किए हैं. सऊदी अरब के सेंट्रल बैंक ने सिल्वर मार्केट में एंट्री की है और SLV जैसे सिल्वर ETF में शेयर खरीदे हैं. एनालिस्ट्स का कहना है कि सेंट्रल बैंक लंबे समय से सोना खरीदते रहे हैं लेकिन सिल्वर की तरफ यह बदलाव इसे रिटेल मार्केट से परे एक इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर पहचान दिला सकता है.

इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर सिल्वर

रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स भी डिमांड बढ़ा रहे हैं. सिल्वर ETF और फंड्स में रिकॉर्ड इन्वेस्टमेंट हो रहा है. भारत में निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF ने हाल ही में AUM में 10,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है, जो इस फॉर्मेट में बढ़ते भरोसे को दिखाता है. सप्लाई की कमी और बढ़ते प्रीमियम के कारण कुछ फंड्स ने नए इन्वेस्टमेंट रोक दिए हैं. इन्वेस्टमेंट एसेट के तौर पर सिल्वर का भविष्य काफी अच्छा दिख रहा है.

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