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Supreme Court on JP Associates Case: जेपी ग्रुप की कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स को हासिल करने की होड़ अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. गौतम अडानी के बढ़ते साम्राज्य के विस्तार को रोकने की अनिल अग्रवाल की कोशिशों को सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने अडानी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है.
NCLT ने इस कंपनी के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की ₹14,500 करोड़ की समाधान योजना को मंज़ूरी दे दी थी, जिसके खिलाफ दिवाला कार्यवाही चल रही है. हालांकि, अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी और अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की.
कौन हैं अनिल अग्रवाल?
अनिल अग्रवाल एक जाने-माने भारतीय अरबपति व्यवसायी हैं और वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के संस्थापक/अध्यक्ष हैं, जो प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में काम करने वाली एक वैश्विक कंपनी है. उन्हें अक्सर भारत का मेटल किंग कहा जाता है; उन्होंने कबाड़ के छोटे से कारोबार से शुरुआत करके एक ऐसी विशाल कंपनी खड़ी की, जिसकी जस्ता, एल्युमीनियम, तेल और गैस, तथा बिजली के क्षेत्र में बड़ी मौजूदगी है, और जिनकी अनुमानित कुल संपत्ति ₹27,930 करोड़ से भी अधिक है.
मामले का पूरा दायरा क्या है?
असल में, अनिल अग्रवाल की कंपनी, वेदांता लिमिटेड ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के एक फैसले को चुनौती दी थी, जिसने अडानी की अधिग्रहण प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया था. वेदांता चाहती थी कि जब तक विवाद सुलझ न जाए, तब तक अडानी की डील पर रोक लगा दी जाए. हालांकि, देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया कि वह इस चरण पर इस प्रक्रिया में दखल नहीं देगी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश जारी किए?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच मामले की गंभीरता को देखते हुए, कई सख्त निर्देश भी जारी किए हैं:
- अडानी और वेदांता की दलीलें: कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे 10 अप्रैल से NCLAT के सामने अपनी दलीलें पेश करें.
- जल्द फैसले का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से आग्रह किया है कि वह इस विवाद को जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी सुलझाए.
- नीतिगत फैसलों पर रोक: जब तक फैसला नहीं आ जाता, तब तक JP Associates की मॉनिटरिंग कमेटी को NCLAT से पहले मंज़ूरी लिए बिना कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से मना किया गया है.
कब शुरू हुआ विवाद?
JP Associates अभी दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजर रही है. पिछले नवंबर में, लेनदारों ने अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा पेश की गई एक समाधान योजना को मंज़ूरी दे दी थी, जिससे अनिल अग्रवाल की वेदांता पीछे रह गई थी. इसके बाद, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी इस योजना पर अपनी मुहर लगा दी थी. वेदांता ने दो अलग-अलग अपीलों के ज़रिए इसी फैसले को चुनौती दी है, और डील की वैधता पर सवाल उठाए हैं. फिलहाल, गेंद NCLAT के पाले में है, जहाँ 10 अप्रैल को होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि JP Associates का असली मालिक कौन बनेगा.