Live
Search
Home > बिज़नेस > जामनगर में अंबानी ने ऐसा क्या बनाया? ट्रंप भी हो गए जिसके दिवाने; रिलायंस को बनाना चाह रहे अमेरिका का रिफाइनरी पार्टनर

जामनगर में अंबानी ने ऐसा क्या बनाया? ट्रंप भी हो गए जिसके दिवाने; रिलायंस को बनाना चाह रहे अमेरिका का रिफाइनरी पार्टनर

Reliance Jamnagar Refinery:जामनगर रिफाइनरी की खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है, जो 21.1 है और दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: March 12, 2026 16:01:22 IST

Mobile Ads 1x1

Trump Reliance Oil Refinery Deal: वैश्विक ऊर्जा की दुनिया में कुछ प्रोजेक्ट बहुत बड़े होते हैं और कुछ इतने बड़े कि उन्हें “ट्रम्प स्टाइल” कहा जा सकता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका करीब 50 साल बाद अपना नया ऑयल रिफाइनरी बनाएगा. इस प्रोजेक्ट में भारत की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी निवेश करेगी. रिलायंस ने इसे “300 अरब डॉलर का ऐतिहासिक सौदा” बताया और कहा कि इससे अमेरिका फिर से ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनेगा.

हालांकि, रिलायंस के बड़े-बड़े फैलाव से अलग देखें तो यह प्रोजेक्ट इसलिए खास है क्योंकि अमेरिका में बनने वाली इस नई रिफाइनरी में भारत की एक बड़ी कंपनी निवेश कर रही है. यह रिफाइनरी अमेरिका के टेक्सास राज्य के पोर्ट ऑफ ब्राउन्सविले में बनने की योजना है. दिलचस्प बात यह है कि भारत एक ही समय में रूस, ईरान और अमेरिका जैसे देशों के साथ तेल संबंध बनाए हुए है.

अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग प्रोजेक्ट

इस नई रिफाइनरी का नाम “अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग” रखा गया है. इसका मकसद अमेरिका में निकलने वाले शेल ऑयल को प्रोसेस करना और उससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे फ्यूल बनाकर दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करना है. अमेरिका में बड़ी मात्रा में हल्का शेल ऑयल निकलता है लेकिन वहां की कई पुरानी रिफाइनरियां भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनाई गई थीं. इसलिए यह नई रिफाइनरी इस समस्या को हल करने में मदद कर सकती है.

रिलायंस क्यों है खास पार्टनर

इस प्रोजेक्ट में भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस बड़ी निवेशक है. रिलायंस के पास गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है.1990 के दशक के अंत में जब इस जगह पर रिफाइनरी बनाने की योजना बनी थी, तब कई कॉन्ट्रैक्टरों ने कहा था कि यहां पानी, बिजली और सड़क की कमी है, इसलिए यह संभव नहीं है. लेकिन रिलायंस के फाउंडर धीरूभाई अंबानी की सोच और बाद में मुकेश अंबानी की अधिग्रहण में यह प्रोजेक्ट सफल हुआ. 

जामनगर रिफाइनरी की खासियत

जामनगर रिफाइनरी की खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है, जो 21.1 है और दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है. इसका मतलब है कि यह रिफाइनरी कम क्वालिटी वाले भारी कच्चे तेल को भी प्रोसेस करके हाई क्वालिटी वाला फ्यूल बना सकती है.जामनगर रिफाइनरी बनने के बाद भारत जो पहले फ्यूल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था अब पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का बड़ा एक्सपोर्टर बन गया.

अमेरिका को मिलेगा रिलायंस मॉडल

टेक्सास में बनने वाली रिफाइनरी से अमेरिका को रिलायंस का वही एक्सपीरियंस और टेक्नीक मिल सकती है जो जामनगर में इस्तेमाल हुई थी. वहीं भारत और रिलायंस को अमेरिका में एक तरह से ‘जामनगर वेस्ट’बनाने का मौका मिलेगा.

MORE NEWS

Home > बिज़नेस > जामनगर में अंबानी ने ऐसा क्या बनाया? ट्रंप भी हो गए जिसके दिवाने; रिलायंस को बनाना चाह रहे अमेरिका का रिफाइनरी पार्टनर

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: March 12, 2026 16:01:22 IST

Mobile Ads 1x1

Trump Reliance Oil Refinery Deal: वैश्विक ऊर्जा की दुनिया में कुछ प्रोजेक्ट बहुत बड़े होते हैं और कुछ इतने बड़े कि उन्हें “ट्रम्प स्टाइल” कहा जा सकता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका करीब 50 साल बाद अपना नया ऑयल रिफाइनरी बनाएगा. इस प्रोजेक्ट में भारत की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी निवेश करेगी. रिलायंस ने इसे “300 अरब डॉलर का ऐतिहासिक सौदा” बताया और कहा कि इससे अमेरिका फिर से ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनेगा.

हालांकि, रिलायंस के बड़े-बड़े फैलाव से अलग देखें तो यह प्रोजेक्ट इसलिए खास है क्योंकि अमेरिका में बनने वाली इस नई रिफाइनरी में भारत की एक बड़ी कंपनी निवेश कर रही है. यह रिफाइनरी अमेरिका के टेक्सास राज्य के पोर्ट ऑफ ब्राउन्सविले में बनने की योजना है. दिलचस्प बात यह है कि भारत एक ही समय में रूस, ईरान और अमेरिका जैसे देशों के साथ तेल संबंध बनाए हुए है.

अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग प्रोजेक्ट

इस नई रिफाइनरी का नाम “अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग” रखा गया है. इसका मकसद अमेरिका में निकलने वाले शेल ऑयल को प्रोसेस करना और उससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे फ्यूल बनाकर दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करना है. अमेरिका में बड़ी मात्रा में हल्का शेल ऑयल निकलता है लेकिन वहां की कई पुरानी रिफाइनरियां भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनाई गई थीं. इसलिए यह नई रिफाइनरी इस समस्या को हल करने में मदद कर सकती है.

रिलायंस क्यों है खास पार्टनर

इस प्रोजेक्ट में भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस बड़ी निवेशक है. रिलायंस के पास गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है.1990 के दशक के अंत में जब इस जगह पर रिफाइनरी बनाने की योजना बनी थी, तब कई कॉन्ट्रैक्टरों ने कहा था कि यहां पानी, बिजली और सड़क की कमी है, इसलिए यह संभव नहीं है. लेकिन रिलायंस के फाउंडर धीरूभाई अंबानी की सोच और बाद में मुकेश अंबानी की अधिग्रहण में यह प्रोजेक्ट सफल हुआ. 

जामनगर रिफाइनरी की खासियत

जामनगर रिफाइनरी की खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है, जो 21.1 है और दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है. इसका मतलब है कि यह रिफाइनरी कम क्वालिटी वाले भारी कच्चे तेल को भी प्रोसेस करके हाई क्वालिटी वाला फ्यूल बना सकती है.जामनगर रिफाइनरी बनने के बाद भारत जो पहले फ्यूल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था अब पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का बड़ा एक्सपोर्टर बन गया.

अमेरिका को मिलेगा रिलायंस मॉडल

टेक्सास में बनने वाली रिफाइनरी से अमेरिका को रिलायंस का वही एक्सपीरियंस और टेक्नीक मिल सकती है जो जामनगर में इस्तेमाल हुई थी. वहीं भारत और रिलायंस को अमेरिका में एक तरह से ‘जामनगर वेस्ट’बनाने का मौका मिलेगा.

MORE NEWS