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Budget 2026: निर्मला सीतारमण का बड़ा फैसला, खादी-हैंडलूम के लिए शुरू होगी महात्मा गांधी ग्राम स्वरोजगार योजना; जानें इसमें क्या है खास

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 बजट पेश के दौरान खादी और हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वरोजगार पहल की घोषणा की.

Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: 2026-02-01 12:44:03

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Budget 2026: आज 01 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. इस दौरान वो भारत की विकास गति को बढ़ाने के लिए कई मुद्दों पर एलान कर रही हैं. वित्त मंत्री ने पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा देते हुए खादी और हस्तशिल्प को समर्थन देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम समाज पहल की शुरुआत की घोषणा की है. पढ़िए पूरी खबर. 

खादी उद्योग को मिलेगी मजबूती

निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि समर्थ 2.0 के तहत वस्त्र उद्योग को उन्नत बनाया जाएगा. वित्त मंत्री ने वस्त्र क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना का प्रस्ताव रखा. उन्होंने खादी और हस्तशिल्प को समर्थन देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम समाज पहल की शुरुआत की भी घोषणा की. साथ ही वित्त मंत्री ने कहा प्राकृतिक, मानव निर्मित और न्यू ऐज फाइबर में आत्‍मनिर्भरता के लिए राष्‍ट्रीय फाइबर योजना शुरू होगी. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रशिक्षण, कौशल विकास, उत्पादन और गुणवत्ता की जांच पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. 

हैंडलूम कारीगरों को राहत 

पिछले कुछ समय से हैंडलूम कारीगर बढ़ती लागत की चुनौती से जूझ रहे हैं. इस योजना के तहत हथकरघा के कारीगरों की आजीविका बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. इतना ही नहीं इससे खादी का उद्योग और बढ़ने की भी संभावना है. 

MSME के लिए हुआ निवेश

केंद्र सरकार ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण गारंटी सहायता की पेशकश की है. वित्त मंत्री सीतारमण ने एमएसएमई को समर्थन देने के लिए वित्त वर्ष 2027 में आत्मनिर्भर भारत कोष में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ने का प्रस्ताव रखा है.

वित्त मंत्री ने क्या कहा?

वित्त मंत्री ने आगे कहा, ‘आर्थिक विकास को गति देने और उसे बनाए रखने के लिए, मैं छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप का प्रस्ताव करती हूं. सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैनूफैक्च्यूरिंग को बढ़ाना, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना, अग्रणी लघु एवं मध्यम उद्यमों का निर्माण करना, बुनियादी ढांचे के लिए प्रोत्साहन देना, दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना, शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना शामिल है.’

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