Vedanta Anil Agarwal: वेदांता समूह के संस्थापक अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया. अग्निवेश 49 साल के थे. अग्निवेश वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के निदेशक मंडल में शामिल थे. वह अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हो गए थे और इलाज के बीच दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. अब बेटे के मौत के बाद वेदांता के चेयरमैन ने बाद अपनी 75 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति समाज को देने के अपने पुराने वादे को फिर दोहराया है. इस उद्योगपति ने आत्मनिर्भर भारत बनाने को लेकर अपने बेटे के भरोसे का जिक्र किया और अग्निवेश के शब्दों में कहा कि देश में किसी चीज की कमी नहीं है और भारत को कभी पीछे नहीं रहना चाहिए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया पोस्ट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अनिल अग्रवाल ने एक भावुक पोस्ट में लिखा कि ‘हमने मिलकर एक सपना देखा था कि कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी बच्चे को शिक्षा से दूर न रखा जाए, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और हर युवा भारतीय के पास अच्छा काम हो. मैंने अग्निवेश से वादा किया था कि हम जो भी कमाएंगे, उसका 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज को वापस देंगे’.
Today is the darkest day of my life.
My beloved son, Agnivesh, left us far too soon. He was just 49 years old, healthy, full of life, and dreams. Following a skiing accident in the US, he was recovering well in Mount Sinai Hospital, New York. We believed the worst was behind us.… pic.twitter.com/hDQEDNI262
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) January 7, 2026
अग्निवेश अग्रवाल का करियर
अग्निवेश ने वेदांता ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों में अहम भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने हिंदुस्तान ज़िंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर काम किया और 2019 में इस पद से हट गए. उन्होंने वेदांता के सपोर्ट वाली कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) में बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के चेयरमैन के तौर पर भी काम किया. उन्होंने UAE में मौजूद कीमती मेटल रिफाइनिंग कंपनी फुजैरा गोल्ड एफजेडसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया. उन्होंने ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और स्टरलाइट डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज़ जैसी ग्रुप की दूसरी सब्सिडियरीज़ में भी डायरेक्टर के पद संभाले.
अग्निवेश अग्रवाल की संपत्ति
बता दें कि अग्रिवेश अग्रवाल के नेट वर्थ को लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं है. लेकिन जुलाई 2025 की फोर्ब्स सूची के मुताबिक उनके पिता अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति करीब 35,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी. इस संपत्ति के साथ वो बिहार के सबसे अमीर शख्स बन गए थे. वहीं हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में अनिल अग्रवाल को 16वां स्थान दिया गया था. जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स की लिस्ट वे चौथें स्थान पर थे.
कबाड़ से कॉपर, फिर ‘मेटल किंग’ बने अनिल अग्रवाल
1954 में पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल का बचपन एक मामूली मारवाड़ी परिवार में बीता. घर की पैसे की दिक्कतों ने उन्हें शुरू से ही ज़िम्मेदार बना दिया, जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. 19 साल की उम्र में, वह एक टिफिन बॉक्स और एक बिस्तर लेकर मुंबई पहुंचे. अनिल का एकमात्र लक्ष्य अपने दम पर पहचान बनाना था.अपने शुरुआती सालों में, उन्होंने कई बिज़नेस में एक्सपेरिमेंट किए, लेकिन लगातार नौ बार नाकामयाबी मिली. फिर भी उनका इरादा पक्का था. 1976 में उन्होंने वेदांता की शुरुआत की. अनिल अग्रवाल ने स्क्रैप मेटल के काम से शुरुआत की, जिससे उन्हें इंडस्ट्री की बेसिक समझ मिली. उन्होंने 1986 में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज़ की स्थापना के साथ मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखा. 1993 में देश का पहला प्राइवेट कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी शुरू करना एक टर्निंग पॉइंट था. 2001 में बाल्को और हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड (HZL) के एक्विजिशन ने उनके बिज़नेस को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. इन डील्स ने उन्हें इंडस्ट्री में “मेटल किंग” का नाम दिलाया.
दुनिया भर में वेदांता का कारोबार
आज वेदांता ग्रुप जिंक, कॉपर, एल्युमिनियम, सिल्वर, पावर, आयरन, स्टील और ऑयल-गैस जैसे विविध क्षेत्रों में मौजूद है. अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में समूह ने भारत से बाहर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पैर जमाए हैं. आने वाले दशकों को देखते हुए कंपनी सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले ग्लास मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-टेक सेक्टर में भी निवेश कर रही है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.