what is 2-6-10 rule: आजकल भारतीय टेक बाजार में स्मार्टफोन्स के एक से बढ़कर एक ऑप्शन आ चुके हैं कि ऐसे में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर कौन सा स्मार्टफोन लेना उनके लिए किफायती रहेगा. देखा जाता है कि आमतौर पर लोग अपने बजट से ज्यादा का स्मार्टफोन (Budget Friendly Smartphones) ले लेते हैं. जोकि, उन्हें वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है. दरअसल, हम जब शोरूम पर स्मार्टफोन लेने जाते हैं तो चमचमाते फोन और दमदार फीचर्स को देखकर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे अपनी कमाई से ज्यादा का फोन ले बैठते हैं.
इससे बचने के लिए आपको हमेशा 2-6-10 का नियम अपनाना चाहिए. चलिए जानते हैं आखिर यह कैसा नियम है और आपके लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है.
क्या है 2-6-10 का नियम?
दरअसल, 2-6-10 एक प्रकार का फॉर्मुला है, जिसे फाइनेंस के टर्म में इस्तेमाल किया जाता है. इस फॉर्मुला को अपनाकर आप अपने फाइनेंशियल लॉस होने से बचा सकते हैं और एक सस्ती और किफायती डील क्रैक कर सकते हैं. जब भी आप फोन लेने जाएं और किस्त कराएं तो इस फॉर्मुला को ध्यान में जरूर रखें ताकि आप खुद को महंगे फोन लेने से कंट्रोल कर सकें. अगर आप फोन लें भी तो एक सही कैलकुलेशन के साथ ईएमआई कराएं.
क्या कहता है नियम 2
2-6-10 के नियमों में से सबसे पहला नियम यानि 2 आपको बताता है कि आपको फोन लेने से पहले अपना बजट पहले से ही तय कर लेना चाहिए. इस नियम के तहत आप यह ध्यान रखें कि आपकी जितनी सैलरी या महीने की इनकम है आपको उससे आधी कीमत का ही स्मार्टफोन लेना चाहिए.
क्या है नियम 6
2-6-10 के नियमों में से 6 का नियम आपको ईएमआई की अवधि के लिए सचेत करता है. इस नियम के तहत आपको कम से कम समय के लिए अपने फोन की ईएमआई को बनवाना चाहिए. लंबे समय के लिए फोन की ईएमआई कराने से बचना चाहिए. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा 6 महीने की ईएमआई कराएं.
क्या है नियम 10
10 का नियम आपको स्मार्टफोन लेते समय खर्चे को संतुलित रखने के लिए सचेत करता है. इस फॉर्मुला के तहत आपको सैलरी से ज्यादा का फोन तो बिलकुल नहीं लेना चाहिए. कोशिश करें कि जितनी आपकी महीने की कमाई है आपको उसके 10 फीसदी तक का पैसा ही मोबाइल लेने में खर्च करना चाहिए इससे ज्यादा नहीं.