what is eKYC: आज के डिजिटल जमाने में Identity Verification के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है. आप चाहे बैंक में खाता खुलवा रहे हों या किसी सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन ही क्यों न कर रहे हों. अब आपको eKYC की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है. देखा जाए तो eKYC ने न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाया है बल्कि, धोखाधड़ी के मामलों को रोकने में भी अहम भूमिका निभाई है. लेकिन, सवाल यह उठता है कि आखिर ई-केवाईसी की जरूरत वास्तव में पड़ती कहां है.
वैसे तो eKYC को हो रहे साइबर फ्रॉड्स को रोकने के लिए और डिजिटल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लाया गया है. अगर बिना eKYC के काम कराया जाए तो वह कितना वैलिड होगा. इस लेख के माध्यम से हम आज आपको eKYC से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां देने वाले हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं इस बारे में.
क्या है eKYC?
eKYC यानि (Electronic Know Your Customer) है. आसान भाषा में समझें तो eKYC एक पेपरलेस, डिजिटल प्रक्रिया है, जिसके तहत आपकी पहचान को आधारित किया जाता है. इस प्रक्रिया द्वारा आपके आधार नंबर और बायोमेट्रिक के साथ ही साथ ओटीपी का इस्तेमाल कर ग्राक की पहचान को सत्यापन ऑनलाइन किया जाता है. इसमें पूरी तरह से पेपरलेस काम होता है, जिससे सभी जरूरी प्रक्रियाओं को न केवल तेज बल्कि सुरक्षित भी बनाया जा सकता है.
बिना eKYC के कहां हो सकता है काम?
eKYC के बगैर जरूरी काम करना वैसे तो आजकल काफी मुश्किल होता जा रहा है. लेकिन, कुछ जगहों पर जैसे अनौपचारिक काम जैसे किसी को पैसे देना, छोटी कंपनी में किसी क नाम दर्ज करना और छोटे स्टार्टअप में कागजी कार्यवाही कराते समय बिना ई-केवाईसी के काम चल सकता है.
कहां पड़ती है eKYC की जरूरत?
eKYC की जरूरत अब अधिकांश कार्यों में पड़ती है अगर आपको पीएफ से पैसे निकालने हों या बैंक में अपने खाते को सक्रिय रखने के लिए साथ ही साथ नई पॉलिसी खरीदते समय भी ई-केवाईसी की जरूरत पड़ती है. इसके साथ-साथ बैंकिंग और फाइनेंस के लिए भी इसे कराना अनिवार्य है. अगर आप किसी सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो भी ई-केवाईसी को कराना जरूरी है. किसी योजना के तहत सब्सिडी लेने पर भी इसकी जरूरत पड़ती है.