Silver Price: इन दिनों चांदी और कॉपर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की खबरें आ रही हैं. कॉपर का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल तो पहले से ही पता है लेकिन चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर इन्वेस्टर्स और पॉलिसी बनाने वालों तक सभी को हैरान कर दिया है. अब सवाल ये उठ रहा है कि ऐसा क्या बदल गया है जिससे चांदी लगातार मंहगा हो रहा है.
सोने से अलग, चांदी की पहचान दोहरी है. यह न सिर्फ निवेश का सुरक्षित साधन है, बल्कि इंडस्ट्री में भी बेहद जरूरी धातु है. खासतौर पर सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में चांदी की मांग तेज़ी से बढ़ रही है. तो चलिए जानते हैं कि चांदी का इतिहास क्या है और निवेश करने के अलवा चांदी का इस्तेमाल और कहां-कहां किया जाता है.
सोलर पैनलों सिल्वर पेस्ट का इस्तेमाल
सोलर पैनल्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए सिल्वर की बेहद अहम भूमिका होती है. पेस्ट के रूप में सिल्वर सिलिकॉन सोलर सेल्स के आगे और पीछे एक कंडक्टिव लेयर यानी कि एनर्जी को आसानी से फ्लो करने में मदद करने के लिए एक लेयर प्रदान करती है.एक सोलर पैनल में 15 से 20 ग्राम चांदी लगती है. दुनिया भर में 2030 तक सोलर क्षमता के 170 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है.
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में सिल्वर का इस्तेमाल
आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि हमारी कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों में सिल्वर का यूज किया जाता है. वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ी हैं. वहीं आपको बता दें कि आम पेट्रोल या डीजल कार के मुकाबले एक ईवी व्हीकल में 6 गुना ज्यादा सिल्वर का इस्तेमाल होता है. चांदी गाड़ियों में लगी बेटरियां, वायरिंग पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, कंट्रोल यूनिट्स और चार्जिंग स्टेशनों में इस्तेमाल होती है. ईवी व्हीकल के चलन के साथ चांदी की मांग भी बढ़ती जा रही है.
रिपोर्टस की माने तो बड़ी ईवी कारों में लगभग 1 किलो तक चांदी का इस्तेमाल हो सकता है. ईवी व्हीकल में चांदी का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि चांदी बेहतरीन विद्युत कंडक्टर है और इसमें जंग नहीं लगती. इसी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का इस्तेमाल लगभग अनिवार्य माना जाता है.अमेरिका में ही 2030 तक 2.8 करोड़ ईवी चार्जिंग पोर्ट्स लगाने की योजना है, जिनमें चांदी की बड़ी खपत होगी.
AI: डेटा सेंटर्स के लिए चांदी जरूरी
डेटा सेंटर्स डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी मानी जाती है. डेटा सेंटर्स में चांदी का इस्तेमाल बड़े मात्रा में किया जाता है. चांदी सेंटर्स में क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेज चलाने, डेटा स्टोर करने और मैनेज करने और अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम्स को पावर देने के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराता है. सिल्वर के मांग की एक बड़ा हिस्सा यहां से आता है. AI डेटा सेंटर्स में चांदी कनेक्टिविटी, पावर डिस्ट्रीब्यूशन, सेमिकंडक्टर्स और कूलिंग सिस्टम के लिए एक जरूरी रॉ मेटेरियल है.
चांदी का इतिहास
द सिल्वर इंस्टीट्यूट के मुताबिक चांदी का खनन सबसे पहले एंटोलिया यानी आज के तुर्किये में 3,000 ईसा पूर्व में किया गया था. इसका इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है. जहां पहले मिस्र में चांदी का यूज घाव भरने के लिए किया जाता था. मिस्र में इसका इस्तेमाल कई जड़ी-बूटियों में मिलाकर किया जाता था. पेनिसिलिन (1928) की खोज तक इसे मुख्य एंटीबैक्टीरियल माना जाता था.
.रोमन काल में सिल्वर को डेनेरी को पहली करेंसी मानी गई .इनका सर्कुलेशन 211 BC में शुरू हुआ. 48 BC में जूलियस सीजर के राज में इनका इस्तेमाल काफी बढ़ गया. ये तीसरी सदी AD तक सर्कुलेशन में रहे.
100 AD तक स्पेन चांदी की माइनिंग का एक बड़ा सेंटर बन गया. जो रोमन साम्राज्य को चांदी सप्लाई करता था. बाद के सालों में रोमन व्यापारियों ने भारत से मसालों के बदले चांदी का व्यापार किया.
जनवरी 1980 में आई पहली उछाल
चांदी के दामों में बढ़ोतरी की बात करें को ये कहानी 198 में शुरू होती है. तब अमेरिका के दो भाईयों नेल्सन बंकर हंट और विलियम हंट ने पूरे मार्केट पर कब्जा करनें की कोशिश की थी. दोनों भाईयों ने पूरी दुनिया की लगभग एक तिहाई चांदी पर अपना कब्जा कर लिया. जिस वजह से उस समय चांदी के दामों में अचानक बड़ा उछाल आया. चांदी के दाम 6 डॉलर से बढ़कर 49 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए हैं.
दोनो हंट भाइयों का मानना था कि बढ़ती महंगाई के चलते करेंसी की वैल्यू घटेगी और चांदी की बढ़ेगी. जिसकी वजह से दोनों भाइयों ने मिलकर चांदी की खरीदारी शुरू की और भारी मात्रा में चांदी को कलेक्ट कर लिया. उन्होंने चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को भी कोलैटरल के तौर पर इस्तेमाल किया और यहीं पर उनसे गलती हो गई. हंट ब्रदर्स इतनी ज़्यादा मात्रा में चांदी खरीद रहे थे कि अमेरिका रेगुलेटर्स को दखल देना पड़ा. उन्होंने मार्जिन पर नए चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीदने पर रोक लगा दी.
यह हंट ब्रदर्स के लिए मुसीबत बन गया. 27 मार्च 1980 को हंट ब्रदर्स मार्जिन कॉल्स को पूरा नहीं कर पाए, जिससे ब्रोकर्स को चांदी बेचनी पड़ी और एक ही दिन में कीमत 50% से ज़्यादा गिर गई. यह चांदी के इतिहास में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है. कीमत में गिरावट के कारण हंट ब्रदर्स को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और उन्हें बैंकरप्सी के लिए फाइल करना पड़ा. हज़ारों इन्वेस्टर्स भी बर्बाद हो गए. इस घटना के बाद, चांदी को “शैतान की धातु” का निकनेम दिया गया.
2011 में दूसरी बार आई उछाल
चांदी में दूसरी बड़ी उछाल 2011 में आई. इस बार इसका वजह अमेरिका का कर्ज संकट था. इस समयत तक दुनिया अभी 2008 के आर्थीक संकट से उबर नहीं पाई थी. वहीं अमेरिका ने पहली बार ये माना की वह कर्ज के संकट से जूझ रहा है. जिसके बाद लोग डर गए और इन्वेस्टर्स ने सेफ हैवेन के तलाश में सोना-चांदी की ओर रुख किया. लेकिन अमेरिका के कर्ज संकट दूर होने के बाद चांदी की कीमतें फिर से नीचे आ गई. तब 6 महीनों में दाम लगभग 30% से ज्यादा गिर गए थे.
चांदी का तीसरा सबसे बड़ा उझाल 2025 में देखा गया. चांदी के दाम लगभग 100% बढ़ चुके हैं. इसके चलते इसमें निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ रही है.