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विदेशी डिग्री पर ‘वीजा’ का कैसे लगा ग्रहण, क्या अब बदलेंगे भारतीय छात्रों के सपने?

विदेशों में भारतीय छात्रों (Indian Students) की वीजा अस्वीकृति (Visa Refusal) की बढ़ती दर और उसके प्रभाव पर तेजी से चारों तरफ चर्चा की जा रही है.

Indian Students to study abroad: पिछले कई दशकों से ‘विदेशी डिग्री‘ भारतीय मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सफलता का सबसे बड़ा पैमाना देखने को मिली है. लेकिन, हाल के ही कुख सालों में अंतरराष्ट्रीय वीजा नीतियों में आए कड़े बदलावों ने इस सुनहरे सपने पर पूर्ण विराम सा लगा दिया है. जहां, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों, जो कभी भारतीय छात्रों की पहली पसंद थे, वहां से वीजा अस्वीकृतियों (Visa Rejections) की खबरों ने छात्रों के बीच चिंता का विषय पैदा कर दिया है. 

आखिर क्या है वीजा अस्वीकृति की वजह?

जानकारी के मुताबिक, वीजा अस्वीकृति की मुख्य वजह सिर्फ और सिर्फ कागजी कमी नहीं है, बल्कि इन देशों की बदलती घरेलू नीतियां भी अब सामने निकल आ रही हैं. जहां, आवास संकट (Housing Crisis), बढ़ती महंगाई और स्थानीय रोजगार बाजार पर दबाव को देखते हुए कई देशों ने अपनी इमिग्रेशन सीमाओं को फिलहाल, पूरी तरह से सीमित कर दिया है.

इसके अलावा, वित्तीय स्थिरता (Financial Proof) के नियमों को इतना सख्त कर दिया गया है कि कई प्रतिभाशाली छात्र भी उन मानकों को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं. 

छात्रों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा असर

इतना सब कुछ होने से इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर छात्रों के मानसिक और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. जहां, लाखों रुपये की कोचिंग, आवेदन शुल्क और कंसल्टेंसी फीस भरने के बाद जब वीजा रिजेक्ट होता है, तो छात्र न सिर्फ आर्थिक रूप से पिछड़ जाते हैं, बल्कि उनका कीमती समय भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है. यही वजह है कि अब भारतीय छात्र अपने ‘ग्लोबल ड्रीम्स‘ पर एक बार फिर से गहरा विचार करने के बारे में सोच रहे हैं. 

भारत के वैश्विक स्थानों को दी जा रही प्राथमिकता?

तो वहीं, दूसरी तरफ अब कई छात्र अब भारत के अंदर ही वैश्विक स्तर के संस्थानों (जैसे IITs, IIMs, और उभरती हुई निजी यूनिवर्सिटीज) को तेजी से प्राथमिकता भी दे रहे हैं.

इसके साथ ही, ‘हाइब्रिड लर्निंग‘ (आधा कोर्स ऑनलाइन और आधा ऑफलाइन) जैसे विकल्पों को भी भारत में लगातार अपनाया जा रहा है ताकि छात्रों को कम परेशानियों का सामना करना पड़े. फिलहाल, वीजा की इस अनिश्चितता ने छात्रों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिर्फ एक विदेशी टैग के लिए इतना बड़ा जोखिम उठाना समझदारी है या फिर नहीं?

Darshna Deep

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