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शिक्षा और स्किल को रोजगार से जोड़ने की पहल, बनाई जाएगी नई स्थाई समिति, 2047 तक भारत की वैश्विक हिस्सेदारी

Education to Employment and Entrepreneurship: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘शिक्षा से रोज़गार और उद्यम’ समिति की घोषणा की, जो शिक्षा और कौशल को रोजगार और उद्यमिता से जोड़कर भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: 2026-02-01 12:52:47

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Education to Employment and Entrepreneurship Standing Committee: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता को जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की है. उन्होंने ‘शिक्षा से रोज़गार और उद्यम’ नामक उच्च-शक्ति वाली स्थाई समिति स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य शिक्षा और कौशल विकास को सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़कर भारत को 2047 तक वैश्विक सेवा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है.

समिति का उद्देश्य और महत्व

यह समिति मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों पर ध्यान देगी:
विकास – आर्थिक और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देना.
रोज़गार – शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार के अवसरों से जोड़ना.
निर्यात क्षमता – सेवाओं के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाना.

निर्मला सीतारमण के अनुसार समिति का लक्ष्य AI और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का विश्लेषण करना और उनके आधार पर रोजगार और कौशल विकास के उपाय सुझाना है. इससे छात्र और युवा भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार होंगे और उद्यमिता के नए अवसर तलाश सकेंगे.

सेवाओं में वैश्विक नेतृत्व का रोडमैप

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पहल भारत को 2047 तक वैश्विक सेवा क्षेत्र में 10% हिस्सेदारी हासिल करने की दिशा में अग्रसर करेगी. इसमें IT, बिजनेस प्रोसेस आउसोर्सिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और अन्य तकनीकी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी. समिति यह सुनिश्चित करेगी कि भारत में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण न केवल घरेलू रोजगार के लिए सक्षम हों, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत को मजबूत स्थिति दिलाएं.

उभरती तकनीकों का कौशल पर असर

स्थायी समिति का एक महत्वपूर्ण कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों के रोजगार और कौशल पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना होगा. इसके आधार पर यह तय करेगी कि कौन से पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल आवश्यक हैं ताकि युवा और पेशेवर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहें.

शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता का समन्वय

समिति का एक और उद्देश्य शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत कनेक्शन बनाना है. यह सुनिश्चित करेगा कि शिक्षा केवल सैद्धांतिक न रहे, बल्कि प्रैक्टिकल, उद्यमिता-उन्मुख और रोजगार-योग्य बने। इससे नए व्यवसाय, स्टार्टअप और रोजगार सृजन के अवसर भी बढ़ेंगे.

आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा

कुल मिलाकर, ‘शिक्षा से रोज़गार और उद्यम’ स्थायी समिति भारत को सेवाओं में वैश्विक लीडर बनाने, युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह पहल शिक्षा, कौशल और उद्योग के समन्वय के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी.

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