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SDM बनने का जुनून, JNU से बीच में छोड़ी PhD, UPPSC में हासिल की टॉप 2 रैंक, अब LDA में संभाल रही हैं ये पद

SDM Success Story: बड़े सपनों को पाने के लिए सही दिशा और साहस ज़रूरी होता है. हरियाणा की संगीता राघव (Sangeeta Raghav) ने PhD छोड़कर SDM बनने का सपना पूरा किया और युवाओं के लिए मिसाल बनीं.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: February 9, 2026 10:01:34 IST

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SDM Success Story: सपने अगर बड़े हों, तो उनके लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि सही दिशा में लगातार प्रयास करते रहना भी जरूरी होता है. इस कथन हरियाणा की एक लड़की ने सही साबित कर दिखाया है. उन्होंने SDM बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए बीच में ही अपनी PhD छोड़ दी और पूरी ताकत सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में झोंक दी. उनकी यह जिद और जुनून आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. हम जिनकी बात कर रहे हैं, उनका नाम संगीता राघव (Sangeeta Raghav) है.

SDM बनने की जिद और बड़ा फैसला

रिसर्च का रास्ता संगीता के लिए अच्छा था, लेकिन सपना कुछ और ही था. SDM बनने की चाह इतनी गहरी थी कि उन्होंने PhD शुरू करने के एक साल बाद ही उसे छोड़ने का कठिन फैसला ले लिया. वर्ष 2018 से उन्होंने पूरी तरह UPPCS परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. शुरुआत में संगीता रोज़ 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन जैसे-जैसे लक्ष्य नज़दीक आता गया, उन्होंने अपनी मेहनत को 8 से 10 घंटे तक बढ़ा दिया. वर्ष 2017 में उन्होंने पहली बार UPPCS परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी बार में टॉप 2 रैंक हासिल की.

पढ़ाई से रिसर्च तक का सफर

संगीता ने अपनी शुरुआती और ग्रेजुएशन की पढ़ाई गुरुग्राम से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई में बेहतरीन परफॉर्मेंस के चलते उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में PhD प्रोग्राम में दाखिला मिल गया. रिसर्च के दौरान उन्होंने साउथ एशियन इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वर्ल्ड बैंक के एक अहम प्रोजेक्ट पर भी काम किया और उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली.

साधारण परिवार, असाधारण सोच

संगीता मूल रूप से हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शांति नगर की रहने वाली हैं. उनका परिवार शिक्षित और अनुशासित पृष्ठभूमि से आता है. उनके पिता इंडियन नेवी से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं. घर का माहौल पढ़ाई और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला रहा, जिसने संगीता की सोच को बचपन से ही मजबूत बना दिया.

अब संभाल रही हैं ये पद

वर्ष 2018 में संगीता की मेहनत रंग लाई. उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और UPPCS में शानदार रैंक-2 हासिल की. यूपी सरकार के अपॉइंटमेंट एंड पर्सनल विभाग के अनुसार अभी वह फिलहाल लखनऊ विकास प्राधिकरण में ओएसडी के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले वह आगरा, सहारनपुर की डिप्टी कलेक्टर रह चुकी हैं. 

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